इंदौर |
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ इंदौर में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में अर्शदीप सिंह ने भारतीय टीम में वापसी करते ही यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। बाएं हाथ के इस तेज़ गेंदबाज़ ने अपने पहले ही ओवर में विकेट लेकर न सिर्फ टीम इंडिया को शानदार शुरुआत दिलाई, बल्कि चयन को लेकर चल रही बहस को भी एक बार फिर हवा दे दी।
भारतीय प्लेइंग इलेवन में वापसी के बाद अर्शदीप को नई गेंद थमाई गई। ओवर की दूसरी गेंद पर डेवोन कॉनवे ने उन्हें चौका जरूर लगाया, लेकिन अर्शदीप ने बेहतरीन वापसी करते हुए ओवर की आखिरी गेंद पर हेनरी निकोल्स को क्लीन बोल्ड कर दिया। अंदरूनी किनारे से गेंद सीधा स्टंप्स में जा लगी और पूरा स्टेडियम उनके नाम से गूंज उठा।
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सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा
अर्शदीप के इस पहले ओवर के विकेट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर को निशाने पर ले लिया। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि जब अर्शदीप इतना प्रभावी साबित हो रहे हैं, तो उन्हें पहले दो वनडे मुकाबलों में क्यों नहीं खिलाया गया।
एक फैन ने लिखा,
“अर्शदीप ने आते ही विकेट ले लिया, फिर भी गंभीर उन्हें नियमित नहीं खिलाते। यह शर्मनाक है।”
दूसरे फैन ने लिखा,
“हर बार साबित करने के बावजूद अर्शदीप को मौके के लिए लड़ना पड़ता है। चयन नीति समझ से परे है।”
पहले दो मैचों में बाहर रहना बना बहस का मुद्दा
गौरतलब है कि अर्शदीप सिंह को न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले दो वनडे मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी गई थी। उनकी जगह प्रसिद्ध कृष्णा और अन्य तेज़ गेंदबाज़ों को तरजीह दी गई, लेकिन दूसरे वनडे में भारत की हार के बाद टीम मैनेजमेंट ने तीसरे मुकाबले में बदलाव किया और अर्शदीप को मौका मिला।
अर्शदीप को प्रसिद्ध कृष्णा की जगह टीम में शामिल किया गया और उन्होंने इस फैसले को सही ठहराने में ज़रा भी देर नहीं लगाई।
अश्विन ने पहले ही किया था समर्थन
अर्शदीप के चयन को लेकर बहस सिर्फ फैंस तक सीमित नहीं रही। भारत के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी पहले ही अर्शदीप के समर्थन में आवाज़ उठाई थी। अपने यूट्यूब चैनल पर अश्विन ने कहा था कि टीम मैनेजमेंट को अर्शदीप की मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास के बारे में भी सोचना चाहिए।
अश्विन ने कहा,
“यह सिर्फ इस बात का सवाल नहीं है कि किसने कितना खेला है। सवाल यह है कि अर्शदीप क्या सोच रहे होंगे? उन्होंने इतना कुछ किया है, फिर भी उन्हें अपनी जगह के लिए लड़ना पड़ता है। क्रिकेट आत्मविश्वास का खेल है, और गेंदबाज़ों के साथ ऐसा बार-बार क्यों होता है?”
उन्होंने यह भी कहा था कि बल्लेबाज़ों के साथ आमतौर पर ऐसा नहीं होता, लेकिन गेंदबाज़ों को लगातार अपनी उपयोगिता साबित करनी पड़ती है।
चयन नीति पर फिर उठे सवाल
अर्शदीप सिंह की इस प्रभावशाली शुरुआत के बाद एक बार फिर भारतीय टीम की चयन नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। भले ही भारत यह मुकाबला और सीरीज़ हार गया हो, लेकिन अर्शदीप का प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए एक सकारात्मक संकेत जरूर माना जा रहा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले मुकाबलों और सीरीज़ में क्या अर्शदीप सिंह को नियमित रूप से मौका मिलता है या फिर उन्हें हर बार खुद को साबित करने की यही लड़ाई लड़नी पड़ेगी।



