नई दिल्ली/सियोल। North Korea ने शनिवार को समुद्र की दिशा में 10 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह परीक्षण ऐसे समय हुआ जब United States और South Korea संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार मिसाइलें राजधानी Pyongyang के पास से लॉन्च की गईं और देश के पूर्वी तट की ओर समुद्र में गिर गईं।
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि मिसाइलें दोपहर लगभग 1:20 बजे दागी गईं। इन्हें पूर्वी समुद्र की ओर भेजा गया, जहां वे पानी में गिर गईं। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वहीं Japan के तटरक्षक बल ने भी एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल के समुद्र में गिरने की पुष्टि की है। जापान के सार्वजनिक प्रसारक NHK के अनुसार, यह मिसाइल जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर गिरी, जिससे किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
लंबे समय से जारी हैं मिसाइल परीक्षण
उत्तर कोरिया पिछले कई वर्षों से लगातार मिसाइल परीक्षण करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग इन परीक्षणों के जरिए परमाणु हथियारों को दूर तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करना चाहता है। माना जाता है कि उत्तर कोरिया के पास पहले से परमाणु हथियार मौजूद हैं और वह उन्हें मिसाइलों के माध्यम से तैनात करने की क्षमता मजबूत करने में लगा हुआ है।
इसी वजह से 2006 से United Nations Security Council ने उत्तर कोरिया पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का असर देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद प्योंगयांग अपने हथियार कार्यक्रमों को जारी रखे हुए है।
सैन्य अभ्यास पर जताता रहा है विरोध
अमेरिका और दक्षिण कोरिया इस सप्ताह बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। दोनों देशों का कहना है कि ये अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक हैं और उत्तर कोरिया से आने वाले संभावित खतरों के खिलाफ तैयारी के लिए किए जाते हैं।
हालांकि उत्तर कोरिया लंबे समय से इन सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का आरोप है कि ये अभ्यास वास्तव में उस पर हमला करने की तैयारी हैं। इसी कारण जब भी अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त अभ्यास करते हैं, तब उत्तर कोरिया अक्सर मिसाइल परीक्षण या सैन्य गतिविधियों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देता है।
कूटनीतिक प्रयास भी जारी
इस बीच क्षेत्र में कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल जारी है। हाल ही में दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री ने वॉशिंगटन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात की। इस बैठक में उत्तर कोरिया के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
दक्षिण कोरियाई अधिकारी किम मिन-सेक ने बताया कि ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong-un से संभावित मुलाकात को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि अगर मौका मिला तो यह मुलाकात इस साल हो सकती है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक योजना तय नहीं हुई है।
गौरतलब है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच उच्चस्तरीय बातचीत 2019 के बाद से लगभग ठप पड़ी हुई है। हालांकि हाल के महीनों में वॉशिंगटन ने प्योंगयांग के साथ फिर से संवाद शुरू करने की कोशिशें तेज की हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि मिसाइल परीक्षण और सैन्य गतिविधियों के कारण कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उत्तर कोरिया के इन नए परीक्षणों का क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा पर आगे क्या असर पड़ेगा, लेकिन इस घटनाक्रम ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

