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4 बार नीलामी फेल होने के बाद बिकी दाऊद इब्राहिम की पुश्तैनी जमीन, महाराष्ट्र के रत्नागिरी में खरीदार मिला

मुंबई/रत्नागिरी। अंडरवर्ल्ड डॉन Dawood Ibrahim से जुड़ी महाराष्ट्र की पुश्तैनी जमीन आखिरकार 4 असफल कोशिशों के बाद बिक गई है। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित नीलामी में इन संपत्तियों के लिए खरीदार मिल गया है, जिससे वर्षों से लंबित यह प्रक्रिया आगे बढ़ पाई है।

ये चारों जमीन के टुकड़े महाराष्ट्र के Ratnagiri जिले के मुम्बके गांव में स्थित हैं, जिसे दाऊद इब्राहिम का पैतृक गांव माना जाता है। ये संपत्तियां कासकर परिवार की पुश्तैनी जमीन का हिस्सा थीं, जिन्हें 1990 के दशक में जब्त कर लिया गया था।

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केंद्र सरकार की नीलामी में बिकी संपत्ति

5 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने इन जमीनों की नीलामी Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act (SAFEMA) के तहत की। इस नीलामी में मुंबई के एक बोलीदाता ने सबसे ऊंची बोली लगाकर एक प्रमुख जमीन का टुकड़ा 10 लाख रुपये से अधिक में खरीदा।

बताया जा रहा है कि सर्वे नंबर 442 (पार्ट 13-बी) नामक प्लॉट का रिजर्व प्राइस 9.41 लाख रुपये था, जबकि इसे इससे ज्यादा कीमत पर खरीदा गया। इस प्लॉट के लिए दो लोगों ने बोली लगाई थी—एक मुंबई से और दूसरा रत्नागिरी से।

बाकी तीन प्लॉट सर्वे नंबर 533, 453 और 617—के लिए केवल एक-एक बोलीदाता सामने आया, जिन्होंने तय शर्तों को पूरा करते हुए इन जमीनों को खरीद लिया। इन प्लॉट्स की कीमत क्रमशः 2.33 लाख रुपये, 8.08 लाख रुपये और 15,440 रुपये तय की गई थी।

सूत्रों के अनुसार, सभी चारों जमीन के टुकड़े अंततः मुंबई के ही एक खरीदार के पास गए हैं। अब इस सौदे की अंतिम मंजूरी संबंधित प्राधिकरण द्वारा दी जाएगी, जिसके बाद भुगतान प्रक्रिया पूरी होगी। खरीदार को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी राशि जमा करनी होगी।

4 बार क्यों फेल हुई नीलामी

इन संपत्तियों की नीलामी पहले 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी की गई थी, लेकिन हर बार यह प्रक्रिया असफल रही। नवंबर 2025 में तो रिजर्व प्राइस में लगभग 30 प्रतिशत तक की कटौती भी की गई थी, फिर भी कोई खरीदार सामने नहीं आया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका मुख्य कारण इन जमीनों का दाऊद इब्राहिम और उसके आपराधिक नेटवर्क ‘डी-कंपनी’ से जुड़ा होना था। लोग विवाद और कानूनी जटिलताओं के डर से इन संपत्तियों में निवेश करने से बचते रहे।

इसके अलावा, जमीन का दूरदराज इलाके में होना, केवल कृषि उपयोग की अनुमति और कम व्यावसायिक संभावनाएं भी निवेशकों की रुचि कम करने की बड़ी वजह बनीं।

पहले भी विवादों में रही संपत्तियां

इन संपत्तियों की नीलामी पहले भी कई बार विवादों में रही है। दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव का नाम अक्सर इन नीलामियों से जुड़ता रहा है। उन्होंने 2001 में मुंबई के नागपाड़ा इलाके में दाऊद से जुड़ी दो संपत्तियां खरीदी थीं, लेकिन अब तक उनका कब्जा नहीं मिल पाया है और मामला Bombay High Court में लंबित है।

वहीं, 2020 में उन्होंने मुम्बके गांव में स्थित दाऊद के पुश्तैनी बंगले को भी खरीदा था और वहां ट्रस्ट बनाने की योजना जताई थी। 2024 में उन्होंने एक छोटे प्लॉट के लिए 2.01 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, लेकिन भुगतान न करने के कारण वह सौदा रद्द कर दिया गया।

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कौन है दाऊद इब्राहिम

Dawood Ibrahim भारत के सबसे वांछित अपराधियों में से एक है और ‘डी-कंपनी’ नामक अपराध सिंडिकेट का सरगना माना जाता है। वह 1993 के 1993 Mumbai bombings का मुख्य आरोपी है, जिसमें 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भारत लंबे समय से दावा करता रहा है कि दाऊद इब्राहिम Karachi, पाकिस्तान में छिपा हुआ है, हालांकि पाकिस्तान इस आरोप से इनकार करता रहा है।

रत्नागिरी में दाऊद इब्राहिम की पुश्तैनी जमीन की बिक्री कई वर्षों की असफल कोशिशों के बाद संभव हो पाई है। यह नीलामी न केवल कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विवादित संपत्तियों के प्रति निवेशकों का नजरिया धीरे-धीरे बदल रहा है। हालांकि, अंतिम मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह सौदा पूरी तरह संपन्न माना जाएगा।

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