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वैश्विक तनाव के बीच शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स 300 अंक फिसला,निफ्टी में भी कमजोरी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। बुधवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रही, जहां BSE Sensex 300 अंकों से अधिक गिरकर खुला, जबकि Nifty 50 में भी करीब 90 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में प्रगति न होना बताया जा रहा है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है।

करेंसी बाजार में भी दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 93.70 के स्तर पर खुला, जो विदेशी निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

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हालांकि दिन के दौरान बाजार में कुछ सुधार देखने को मिला। दोपहर 1 बजे के आसपास निफ्टी 50 लगभग 0.59% की बढ़त के साथ 24,432 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा, जबकि सेंसेक्स अब भी दबाव में रहा और करीब 700 अंकों की गिरावट के साथ 78,563 के आसपास बना रहा। इससे साफ है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

सेक्टोरल स्तर पर आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% से ज्यादा गिरा, जिसमें HCL Technologies, Tech Mahindra और Infosys जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की मजबूती देखी गई।

आज कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। SBI Life Insurance, Tech Mahindra, Tata Communications और Havells India जैसी कंपनियां अपने परिणाम जारी करने वाली हैं, जिससे बाजार की दिशा तय हो सकती है।

इस बीच, ब्रोकरेज फर्म OmniScience Capital ने लंबी अवधि के लिए सकारात्मक अनुमान जताया है। उनके अनुसार, मार्च 2027 तक निफ्टी 50 का स्तर 28,000 से 31,000 के बीच पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से 15% से 25% तक की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार पर वैश्विक घटनाक्रमों का गहरा असर है। कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। यदि ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, तो बाजार में और अस्थिरता आ सकती है।

फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सतर्क रहें और किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करें। वहीं, लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में अच्छे शेयरों में धीरे-धीरे निवेश की रणनीति अपना सकते हैं।

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