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स्वस्थ डाइट पर भी उठे सवाल, नई स्टडी में फलों-सब्जियों और लंग कैंसर के बीच संबंध का दावा

नई दिल्ली:
एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि ज्यादा हेल्दी डाइट लेने वाले नॉन-स्मोकर्स में भी लंग कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने इसे शुरुआती अध्ययन बताते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है और कहा है कि इस निष्कर्ष की पुष्टि के लिए और शोध जरूरी है।

यह अध्ययन American Association for Cancer Research की वार्षिक बैठक में पेश किया गया। रिसर्च का नेतृत्व Jorge Nieva ने किया, जो USC Norris Comprehensive Cancer Center से जुड़े हैं। अध्ययन अभी पीयर-रिव्यू (समीक्षित) नहीं हुआ है, इसलिए इसके निष्कर्षों को अंतिम नहीं माना जा सकता।

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क्या कहती है स्टडी
शोधकर्ताओं ने 50 साल या उससे कम उम्र के 187 लंग कैंसर मरीजों के डाइट, लाइफस्टाइल और अन्य डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि जो नॉन-स्मोकर्स थे और जिनकी डाइट में हरी सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज अधिक थे, उनमें लंग कैंसर के मामलों की एक कड़ी दिखी।

शोध के अनुसार, इन मरीजों ने औसत लोगों की तुलना में अधिक मात्रा में डार्क ग्रीन वेजिटेबल्स, लेग्यूम्स और होल ग्रेन्स का सेवन किया था।

पेस्टिसाइड पर शक
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस संबंध के पीछे एक संभावित कारण फसलों पर इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक (पेस्टिसाइड) हो सकते हैं। अध्ययन में कहा गया कि पारंपरिक (नॉन-ऑर्गेनिक) तरीके से उगाए गए फल-सब्जियों में पेस्टिसाइड के अवशेष अधिक हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोग, जो लंबे समय तक पेस्टिसाइड के संपर्क में रहते हैं, उनमें लंग कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है।

बढ़ते मामले चिंता का विषय
शोध के अनुसार, 50 साल से कम उम्र के नॉन-स्मोकर्स, खासकर महिलाओं में लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि धूम्रपान की दर में गिरावट आई है। इससे यह सवाल उठता है कि कैंसर के अन्य पर्यावरणीय कारण क्या हो सकते हैं।

अभी निष्कर्ष अंतिम नहीं
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल एक “एसोसिएशन” दिखाता है, यानी संबंध का संकेत देता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि पेस्टिसाइड या हेल्दी डाइट ही कैंसर का कारण है।

Marc Siegel जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटा और ऑब्जर्वेशनल अध्ययन है, जिससे ठोस निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पेस्टिसाइड का कितना एक्सपोजर खतरनाक है, यह अभी स्पष्ट नहीं है और इस पर और रिसर्च की जरूरत है।

क्या करें लोग
रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि लोग फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं और जहां संभव हो, ऑर्गेनिक विकल्प चुनें।

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साथ ही, वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में खून और यूरिन टेस्ट के जरिए शरीर में पेस्टिसाइड के स्तर को मापने पर और अध्ययन किए जाएंगे, जिससे इस संबंध को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
यह अध्ययन एक नई दिशा जरूर दिखाता है, लेकिन फिलहाल इससे डरने की बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। संतुलित आहार, साफ-सफाई और जागरूकता ही स्वास्थ्य के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता माना जा रहा है।

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