भारत में राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद माना जाता है। राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होते हैं और भारतीय लोकतंत्र में उनका विशेष महत्व है। हालांकि भारत में raashtrapati ka chunaav आम चुनावों की तरह सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता। यहां राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के तहत होता है, जिसमें जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि मतदान करते हैं।
अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली से होता है चुनाव
भारत में राष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 55 के तहत किया जाता है। इस प्रक्रिया में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली” और “एकल संक्रमणीय मत पद्धति यानी Single Transferable Vote System का इस्तेमाल होता है। इसका अर्थ है कि मतदाता केवल एक वोट देता है, लेकिन अपनी पसंद के उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम में अंकित करता है।
राष्ट्रपति चुनाव में कौन करता है मतदान?
राष्ट्रपति के चुनाव में आम जनता भाग नहीं लेती। इसके लिए एक विशेष निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज बनाया जाता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सांसद तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक शामिल होते हैं।
हालांकि राज्यसभा के मनोनीत 12 सदस्य और लोकसभा के मनोनीत सदस्य इस चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ही वोट देने का अधिकार होता है।
सांसदों और विधायकों के वोट की कीमत अलग
राष्ट्रपति चुनाव की सबसे खास बात यह है कि इसमें हर वोट की कीमत समान नहीं होती। सांसदों और विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग तय किया जाता है।
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विधायकों के वोट का मूल्य संबंधित राज्य की जनसंख्या और विधानसभा सदस्यों की संख्या के आधार पर तय किया जाता है। वहीं सभी सांसदों के वोट का मूल्य समान होता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखना है।
कैसे होती है वोटिंग प्रक्रिया?
राष्ट्रपति चुनाव में मतपत्र का उपयोग किया जाता है। सांसदों को हरे रंग का मतपत्र दिया जाता है, जबकि विधायकों को गुलाबी रंग का मतपत्र मिलता है। मतदान के दौरान चुनाव आयोग की ओर से विशेष पेन उपलब्ध कराया जाता है। उसी पेन का उपयोग करना अनिवार्य होता है, अन्यथा वोट अमान्य माना जा सकता है।
मतदाता बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के सामने 1, 2, 3 लिखकर अपनी प्राथमिकताएं तय करते हैं। सबसे पहले पहली पसंद के वोट गिने जाते हैं। यदि किसी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत नहीं मिलता, तो दूसरी प्राथमिकता के वोट ट्रांसफर किए जाते हैं। इसी कारण इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहा जाता है।
राष्ट्रपति बनने के लिए क्या हैं योग्यताएं?
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए कुछ आवश्यक योग्यताएं तय की गई हैं। उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए और उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही वह लोकसभा सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो।
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उम्मीदवार किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए। हालांकि वर्तमान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मंत्री इस नियम से बाहर रखे गए हैं।
राष्ट्रपति का कार्यकाल और शपथ
भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। निर्वाचित होने के बाद राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं। यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध नहीं हों तो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश यह जिम्मेदारी निभाते हैं।
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लोकतंत्र की अनोखी प्रक्रिया
भारत में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से काफी अलग और तकनीकी मानी जाती है। इसमें गणितीय गणना, वोटों का मूल्य और प्राथमिकता आधारित मतदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि राष्ट्रपति चुनाव भारतीय लोकतंत्र की सबसे अनोखी और संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में गिना जाता है।

