वॉशिंगटन डीसी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने को लेकर आक्रामक रुख अपनाते हुए दुनियाभर के देशों को टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर किसी देश ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी योजना का विरोध किया, तो उस पर व्यापारिक शुल्क (टैरिफ) लगाए जाएंगे।
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व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के दौरान ट्रम्प ने यह बयान दिया, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा और इसके लिए किस कानूनी अधिकार का इस्तेमाल होगा। इस बयान के बाद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर ट्रम्प की तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन लिखा-मिस्टर टैरिफ।
कनाडा और NATO देशों का कड़ा रुख
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रम्प के बयान का विरोध करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड के मालिकाना हक का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के लोगों और डेनमार्क का अधिकार है।
कार्नी ने NATO सहयोगियों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय वादों और संधियों का सम्मान करें।
‘गोल्डन डोम’ प्रोजेक्ट के लिए जरूरी ग्रीनलैंड
ट्रम्प ने दावा किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका के महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ‘गोल्डन डोम’ के लिए बेहद अहम है। यह प्रोजेक्ट इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित है और इसका उद्देश्य चीन व रूस से संभावित खतरों से अमेरिका की रक्षा करना है।
ट्रम्प का कहना है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया तो वहां रूस और चीन का प्रभाव बढ़ सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होगा।
ग्रीनलैंड पहुंचे अमेरिकी सांसद
इसी बीच अमेरिकी संसद का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ग्रीनलैंड और डेनमार्क के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर स्थानीय लोगों की राय जानी। सांसदों का कहना है कि वे हालात को समझकर वॉशिंगटन में तनाव कम करने की कोशिश करेंगे।
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अमेरिका में भी बंटी राय
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी मतभेद सामने आए हैं। एक तरफ कुछ सांसद ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के पक्ष में बिल ला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जबरन कब्जे के खिलाफ भी विधेयक पेश किए गए हैं।
यूरोपीय देशों का डेनमार्क को समर्थन
ग्रीनलैंड विवाद के बीच फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के समर्थन में कदम बढ़ाए हैं। ये देश ग्रीनलैंड में निगरानी और सैन्य अभ्यास के लिए सीमित संख्या में सैनिक भेज रहे हैं।
ट्रम्प का सख्त बयान
ट्रम्प ने साफ कहा है कि वे सिर्फ संधि या लीज नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण चाहते हैं।अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें सैन्य विकल्प भी शामिल हैं।
ग्रीनलैंड क्यों है इतना अहम
• रणनीतिक स्थिति: उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित
• सैन्य महत्व: मिसाइल चेतावनी और निगरानी के लिए अहम
• चीन-रूस पर नजर: आर्कटिक में बढ़ती गतिविधियों पर नियंत्रण
• प्राकृतिक संसाधन: रेयर अर्थ मिनरल्स, तेल और गैस
• नई समुद्री राहें: बर्फ पिघलने से खुल रहे नए व्यापारिक रास्ते
स्थानीय विरोध
हालिया सर्वे के मुताबिक, 85% ग्रीनलैंड के लोग अमेरिकी कब्जे के खिलाफ हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह का कब्जा या खरीद अस्वीकार्य है।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प की टैरिफ डिप्लोमेसी ने वैश्विक राजनीति में नया तनाव खड़ा कर दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में NATO और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है।

