नई दिल्ली: विदेश में पढ़ाई और बेहतर जिंदगी का सपना देखने वाले लाखों भारतीय छात्रों के लिए कनाडा एक पसंदीदा देश रहा है। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक वीडियो ने इस “कनाडियन ड्रीम” की हकीकत को सामने ला दिया है। भारतीय छात्रा ज्योति खरायत की कहानी ने यह दिखाया है कि विदेश में पढ़ाई करना जितना आकर्षक दिखता है, उतना आसान नहीं होता।
फीस और काम के बीच फंसा संघर्षपूर्ण जीवन
ज्योति का एक वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के संघर्ष को साझा करती नजर आ रही हैं। वीडियो में वह कहती हैं, “स्कूल जाने के लिए फीस चाहिए और फीस के लिए काम चाहिए,” जो कि उनकी जिंदगी का एक अंतहीन चक्र बन चुका है। यह स्थिति कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों की वास्तविकता को दर्शाती है।
कठिन दिनचर्या और दोहरी जिम्मेदारी
कनाडा में पढ़ाई कर रही ज्योति का रूटीन बेहद कठिन है। वह सुबह कॉलेज जाती हैं, फिर पार्ट-टाइम नौकरी के लिए स्टारबक्स में काम करती हैं और फिर घर लौटकर अगले दिन की तैयारी करती हैं। यह सिलसिला रोज दोहराया जाता है, जिससे उनके पास सामान्य छात्र जीवन जीने का समय नहीं बचता।
विदेश में पढ़ाई का वास्तविक दबाव
इस वीडियो ने यह भी उजागर किया है कि विदेश में पढ़ने वाले छात्रों को ट्यूशन फीस, किराया और दैनिक खर्चों को संभालने के लिए लगातार काम करना पड़ता है। ऐसे में उनकी जिंदगी पढ़ाई और नौकरी के बीच एक “अनंत चक्र” बन जाती है, जिसमें संतुलन बनाना बेहद मुश्किल होता है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने ज्योति की मेहनत और संघर्ष की सराहना की है, जबकि कुछ ने इसे विदेश में पढ़ाई की कठिन सच्चाई बताया है। एक यूजर ने लिखा, “अगर आप खुश हैं तो वही काफी है,” वहीं कई लोगों ने इसे प्रेरणादायक कहानी बताया।
विदेशी छात्रों के लिए जॉब मार्केट की चुनौती
कई यूजर्स ने यह भी कहा कि कनाडा में पार्ट-टाइम नौकरी पाना आसान नहीं है और प्रतिस्पर्धा काफी ज्यादा है। यही वजह है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी झेलना पड़ता है, जिससे उनका जीवन और कठिन हो जाता है।
सपनों के पीछे छिपी सच्चाई
ज्योति खरायत की यह कहानी उन हजारों भारतीय छात्रों की वास्तविकता को सामने लाती है, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश जाते हैं। यह स्पष्ट करता है कि विदेश में जीवन केवल अवसरों से भरा नहीं होता, बल्कि वहां मेहनत, संघर्ष और मानसिक दबाव भी उतना ही बड़ा हिस्सा होता है।

