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Hindi News / खेलकूद

Asian para games: आखिरी निशाने ने छीना पदक, चौथे स्थान पर रहे Swaroop Unhalkar

नई दिल्ली। Japan के आइची-नागोया में आयोजित Asian Para Games की Shooting स्पर्धा में भारतीय पैरा निशानेबाज Swaroop Unhalkar पदक जीतने से चूक गए। आर-1 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के फाइनल में चौथा स्थान...

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<span class="title-highlight-color">Asian para games:</span> आखिरी निशाने ने छीना पदक, चौथे स्थान पर रहे Swaroop Unhalkar

नई दिल्ली। Japan के आइची-नागोया में आयोजित Asian Para Games की Shooting स्पर्धा में भारतीय पैरा निशानेबाज Swaroop Unhalkar पदक जीतने से चूक गए। आर-1 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के फाइनल में चौथा स्थान हासिल करने वाले Swaroop का मानना है कि उनका प्रदर्शन अच्छा था, लेकिन आखिरी निशाने ने पदक की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मंगलवार को एक विशेष बातचीत में उन्होंने अपने प्रदर्शन, संघर्ष और भारतीय निशानेबाजी व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर बात की।

Swaroop Unhalkar ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान उनका प्रदर्शन अच्छा चल रहा था और वह लगातार पदक की दौड़ में बने हुए थे। South Korea के खिलाड़ियों ने 10.9 का स्कोर किया, जबकि उनका स्कोर भी 10.5 से ऊपर चल रहा था। हालांकि, आखिरी निशाना 9.9 पर लगने के कारण वह पदक से दूर रह गए।

उन्होंने कहा, “खेल अच्छा चल रहा था और मैं पदक की दौड़ में था, लेकिन आखिरी निशाना 9.9 पर चला गया। इससे पूरा खेल बदल गया। अच्छे प्रदर्शन और मेहनत के साथ खेल में भाग्य का साथ भी जरूरी होता है।”


Abhinav Bindra से मिली प्रेरणा, ऐसे शुरू हुआ सफर

39 वर्षीय Swaroop का सफर संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में जब वह 20 साल के थे, तब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि जिंदगी में आगे क्या करना है? उस समय उनके माता-पिता ने उन्हें मोटरसाइकिल खरीदकर दी और बाहर निकलकर दुनिया देखने तथा अपनी जिंदगी को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया।

इसी दौरान Beijing Olympic में Abhinav Bindra को स्वर्ण पदक जीतते देखकर Swaroop को निशानेबाजी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कोल्हापुर के Shooting Centre में प्रशिक्षण शुरू किया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।

BA तक पढ़ाई करने वाले Swaroop वर्तमान में Government of Maharashtra में Assistant Director Of Sports के पद पर कार्यरत हैं। वह पुणे के बालेवाड़ी में रहते हैं। पिछले 18 वर्षों में उन्होंने छह राष्ट्रीय चैंपियनशिप सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। वह Tokyo 2020 Paralympics और Paris 2024 Paralympics में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

Coaching system पर उठाए सवाल

Swaroop ने भारतीय पैरा निशानेबाजी में प्रशिक्षकों की कमी को बड़ी चुनौती बताया। उनके अनुसार, पांच राइफल निशानेबाजों के लिए एक ही कोच होने से खिलाड़ियों की तकनीक, प्रदर्शन और मानसिक तैयारी पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने मुख्य कोच JP Nautiyal की तारीफ करते हुए कहा कि वह 2017 से टीम से जुड़े हैं और उनके अनुभव से खिलाड़ियों को लाभ मिला है। Swaroop ने कोच को टीम से बाहर रखे जाने पर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि प्रतियोगिता के दौरान मुख्य कोच की मौजूदगी खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Swaroop के मुताबिक, Japan रवाना होने से पहले खिलाड़ियों ने Delhi में भारतीय खेल प्राधिकरण के अधिकारियों से मुलाकात कर JP Nautiyal को दोबारा टीम में शामिल करने की मांग की थी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने कोच पर इनाम की राशि में हिस्सा लेने के आरोपों को निराधार बताया। इस मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

पत्नी को भी दिलाया निशानेबाजी का प्रशिक्षण

Swaroop की निजी जिंदगी भी प्रेरणादायक है। वर्ष 2022 में विवाह के बाद उन्होंने अपनी पत्नी Romi Unhalkar को निशानेबाजी का प्रशिक्षण दिलाया। एक पैर से दिव्यांग Romi ने उसी वर्ष इस खेल की शुरुआत की और अब तक दक्षिण कोरिया तथा दुबई में दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।

पदक से चूकने के बावजूद Swaroop Unhalkar का सफर मेहनत, हौसले और निरंतर प्रयास की मिसाल है। उनका मानना है कि खेल में सफलता के लिए प्रतिभा और अभ्यास के साथ सही मार्गदर्शन तथा परिस्थितियों का साथ भी जरूरी है।

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