नई दिल्ली। कमजोर मानसून और लगातार घटते भूजल स्तर के बीच शहरों में बढ़ती जल सुरक्षा की चुनौती पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में 5 से 7 अक्तूबर तक आयोजित अर्बन अड्डा-2026 में गुरुजल की ओर से आयोजित विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि शहरी जल संकट और जलभराव को अलग-अलग समस्याओं के रूप में देखने के बजाय इन्हें एक ही जल चक्र का हिस्सा मानकर समाधान तलाशने की जरूरत है।
विशेषज्ञों ने वर्षाजल संचयन, जल निकायों के संरक्षण और पुनर्जीवन, भूजल रिचार्ज तथा पानी के पुन: उपयोग को शहरी जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही जल प्रबंधन में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
जल प्रबंधन को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत
‘टुवर्ड्स वाटर-सिक्योर इंडिया : वॉकिंग द टॉक’ सत्र में गुरुजल की सह-संस्थापक डॉ. फौजिया तरन्नुम ने कहा कि देश में पानी को लेकर चर्चा और क्षमता निर्माण की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत इन प्रयासों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की है। उन्होंने जल प्रबंधन को अलग-अलग विभागों तक सीमित रखने के बजाय एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
इंटैक के मनु भटनागर ने कहा कि शहरों का विकास स्थानीय भूगोल और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। एकांक्षा खंडूजा ने समुदायों को केवल लाभार्थी के बजाय जल संरक्षण का भागीदार और संरक्षक बनाने की जरूरत बताई।
अपराजिता वैभव ने कहा कि नागरिकों की भागीदारी योजना बनने के बाद नहीं, बल्कि योजना निर्माण के स्तर से ही होनी चाहिए। जीनेट नियाजी ने कहा कि पानी प्राकृतिक रूप से चक्रीय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे रैखिक बना दिया गया है। दीपेंद्र कपूर ने जल, गर्मी, बाढ़ और जलवायु लचीलेपन से जुड़ी चुनौतियों को एक साथ संबोधित करने पर जोर दिया।
हर बूंद के दोबारा उपयोग पर जोर
दूसरे दिन आयोजित ‘सर्कुलैरिटी फॉर वाटर सिक्योरिटी : क्लोजिंग द लूप’ सत्र में गुरुजल की सह-संस्थापक एवं सीईओ शुभी केसरवानी ने चर्चा का संचालन किया।
सत्र में टीईआरआई स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज की डॉ. रंजना रे चौधरी, हरियाणा सरकार के इंजीनियर-इन-चीफ एवं स्टेट वाटर रेगुलेटरी अथॉरिटी के सीईओ डॉ. सतबीर सिंह कादियान, लैंडस्केप आर्किटेक्ट एवं डीडीए की पूर्व अतिरिक्त आयुक्त सविता भंडारी, आर्किटेक्ट वंदना मेनन और टाटा हाउसिंग डेवलपमेंट कंपनी के उपाध्यक्ष कमल कांत सहगल ने जल सुरक्षा, शहरी नियोजन और पानी के पुन: उपयोग से जुड़े विषयों पर विचार रखे।
विशेषज्ञों ने कहा कि शहरी जल संकट और जलभराव एक ही समस्या के दो पहलू हैं। बारिश के पानी को सहेजने के लिए तालाब, झील, वेटलैंड और ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है। इसके साथ उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने और भूजल के अत्यधिक दोहन को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार शहरों और स्थानीय निकायों को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि उन्हें कितना पानी मिल रहा है, कितना पानी इस्तेमाल हो रहा है, कितना बर्बाद हो रहा है और कितना अपशिष्ट जल पैदा हो रहा है। इसी आधार पर पूरे जलग्रहण क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की जानी चाहिए।
सात साल के जल निकाय पुनर्जीवन कार्यों पर आधारित पुस्तक का विमोचन
अर्बन अड्डा-2026 के दौरान गुरुजल की कॉफी-टेबल बुक ‘रीकनेक्टिंग नेचर, रीकनेक्टिंग लाइव्स’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक में गुरुग्राम में पिछले सात वर्षों के दौरान किए गए जल निकायों के पुनर्जीवन कार्यों को शामिल किया गया है।
गुरुजल के अनुसार, वर्ष 2019 से अब तक 100 से अधिक तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों के पुनर्जीवन पर काम किया गया है।
डेटा सेंटरों के लिए जल ऑडिट पर जोर
‘डेटा सेंटर्स एंड वाटर : पीपल, पॉलिसी एंड प्लानिंग’ सत्र में आशीष देव कपूर, आलोक लाल, अंशुमान, संगीता रघुराम और शुभंकर चौधरी ने डेटा सेंटरों में बढ़ते पानी के उपयोग पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने कहा कि तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर में पानी को परियोजना शुरू होने के बाद का विषय नहीं माना जा सकता। नए डेटा सेंटर की मंजूरी से पहले संबंधित क्षेत्र की जल क्षमता, पानी की उपलब्धता और पानी के पुन: उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाना चाहिए।
इस दौरान जल ऑडिट, मीटरिंग, पारदर्शी रिपोर्टिंग और उपचारित पानी के पुन: उपयोग को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई गई।
जल संरक्षण में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की पहल
अर्बन अड्डा-2026 के तीसरे दिन गुरुजल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) की ओर से वाटर सिटीजंस काउंसिल, दिल्ली-एनसीआर चैप्टर की शुरुआती बैठक आयोजित की गई।
बैठक में शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण में नागरिकों की भूमिका पर चर्चा की। इसमें नागरिक भागीदारी, जल संबंधी निगरानी, सरकार के साथ संवाद और जल संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने पर विचार किया गया।
प्रस्तावित काउंसिल के लिए 90 दिन की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य नागरिकों की आवाज को संगठित करना और जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद स्थापित करना है।
जल सुरक्षा साझा जिम्मेदारी
गुरुजल, अभिप्सा फाउंडेशन की पहल है, जिसकी स्थापना 2019 में गुरुग्राम जिला प्रशासन के साथ हुई थी। संस्था जल निकायों के पुनर्जीवन, भूजल रिचार्ज, वर्षाजल संचयन, अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और जल-सुरक्षित संस्थानों के निर्माण पर काम करती है।
अर्बन अड्डा-2026 में गुरुजल ने इस बात पर जोर दिया कि जल सुरक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। शहरों, विशेषज्ञों, संस्थाओं और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से ही जल संकट से निपटने और शहरों को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
.webp)
.webp)


Leave a Reply