भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। यह डील भारतीय रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है। अनुमान है कि इस सौदे की कीमत करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। इस डील का उद्देश्य भारतीय वायुसेना में घटती स्क्वाड्रन संख्या को मजबूत करना और चीन-पाकिस्तान जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ाना है।
भारतीय वायुसेना लंबे समय से नए लड़ाकू विमानों की मांग कर रही है। वर्तमान में वायुसेना के पास लगभग 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की बताई जाती है। पुराने मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद यह कमी और बढ़ गई है। ऐसे में 114 आधुनिक फाइटर जेट की खरीद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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कौन-कौन सी कंपनियां रेस में
इस मेगा डील के लिए दुनिया की कई बड़ी रक्षा कंपनियां दौड़ में शामिल हैं। इनमें अमेरिका की Lockheed Martin का F-21, Boeing का F/A-18 सुपर हॉर्नेट, फ्रांस की Dassault Aviation का राफेल, स्वीडन की Saab का ग्रिपेन, रूस का मिग-35 और यूरोप का यूरोफाइटर टाइफून शामिल हैं।
राफेल पहले ही भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुका है और उसकी क्षमता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। वहीं अमेरिकी कंपनियां तकनीक हस्तांतरण और भारत में उत्पादन का बड़ा प्रस्ताव दे रही हैं।
मेक इन इंडिया पर रहेगा जोर
इस डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार इसमें मेक in इंडिया मॉडल को प्राथमिकता दे रही है। यानी ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। विदेशी कंपनियों को भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन करना होगा। इससे देश में रोजगार बढ़ने, नई तकनीक आने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होने की उम्मीद है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भारत दुनिया के बड़े रक्षा निर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है। साथ ही भविष्य में भारत अपने फाइटर जेट एक्सपोर्ट करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
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चीन और पाकिस्तान को मिलेगा जवाब
हाल के वर्षों में चीन ने अपनी वायु शक्ति तेजी से बढ़ाई है। पाकिस्तान भी आधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन तकनीक पर काम कर रहा है। ऐसे में भारत की यह डील सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नए फाइटर जेट लंबी दूरी तक हमला करने, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर डिफेंस और परमाणु हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं से लैस होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील सिर्फ विमान खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सैन्य रणनीति और भविष्य की रक्षा नीति का बड़ा हिस्सा बन सकती है। आने वाले महीनों में सरकार और वायुसेना द्वारा तकनीकी परीक्षण और वित्तीय मूल्यांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


