नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी (NCP) के युवा नेता और दिवंगत नेता Ajit Pawar के बेटे Parth Pawar एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। हाल के दिनों में उनका नाम राज्यसभा, बारामती उपचुनाव और पुणे जमीन विवाद जैसे कई मुद्दों को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NCP में अब Pawar परिवार की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है।
हाल ही में Parth Pawar ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। संसद भवन में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई कि NCP आने वाले समय में Parth Pawar को बड़ी जिम्मेदारियां दे सकती है।
NCP में बढ़ता प्रभाव
हाल ही में NCP संगठन में हुए बदलावों के बाद भी Parth Pawar चर्चा में आए। रिपोर्ट्स के अनुसार Sunetra Pawar को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ Parth और उनके भाई Jay Pawar को संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गईं। इससे पार्टी के भीतर Pawar परिवार के प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि Ajit Pawar के निधन के बाद पार्टी में नेतृत्व संतुलन बनाए रखने के लिए परिवार को केंद्र में रखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष इसे परिवारवाद का उदाहरण बता रहा है।
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बारामती उपचुनाव में बयान से बढ़ा विवाद
बारामती उपचुनाव के दौरान Parth Pawar का एक बयान भी काफी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारना महाराष्ट्र में पार्टी के डाउनफॉल की शुरुआत हो सकती है। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर उन पर निशाना साधा।
इस विवाद के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई। NCP नेताओं ने Parth Pawar का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस ने उनके राजनीतिक अनुभव पर सवाल उठाए।
जमीन विवाद में मिला बड़ा राहत संकेत
Parth Pawar का नाम पिछले कुछ महीनों से पुणे के चर्चित मुंढवा जमीन विवाद में भी जुड़ा रहा है। आरोप था कि उनकी कंपनी Amadea Enterprises ने सरकारी जमीन से जुड़े सौदे में कथित अनियमितताओं का लाभ उठाया।
हालांकि फरवरी 2026 में जांच समिति की रिपोर्ट में Parth Pawar को बड़ी राहत मिली। रिपोर्ट में कहा गया कि जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेजों पर उनकी सीधी भूमिका साबित नहीं हुई। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई कि उनके लिए राज्यसभा का रास्ता साफ हो गया है।
लेकिन इसी बीच उनकी कंपनी को 22 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी छूट मामले में झटका भी लगा। महाराष्ट्र प्रशासन ने पहले दिए गए राहत फैसले को बरकरार रखने से इनकार कर दिया, जिससे मामला फिर सुर्खियों में आ गया।
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दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार Parth Pawar इन दिनों दिल्ली में सक्रिय रूप से राजनीतिक बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र विधान परिषद और राज्यसभा की राजनीति में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।
महाराष्ट्र की राजनीति में Pawar परिवार का प्रभाव पहले से ही मजबूत माना जाता रहा है। ऐसे में Parth Pawar की बढ़ती सक्रियता को आने वाले विधानसभा और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Parth Pawar महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।


