Rajesh Exports पर SEBI का शिकंजा: 15 लाख करोड़ के कथित फर्जी रेवेन्यू से मचा हड़कंप

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    Rajesh Exports पर SEBI का शिकंजा: 15 लाख करोड़ के कथित फर्जी रेवेन्यू से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। Rajesh Exports एक बार फिर सुर्खियों में है। देश की बड़ी ज्वेलरी और गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों में शामिल Rajesh Exports पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट देखी गई और निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।

    सेबी का बड़ा आरोप

    SEBI का आरोप है कि Rajesh Exports ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू को गलत तरीके से पेश किया। रेगुलेटर के मुताबिक कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित Valcambi SA से जुड़े वित्तीय आंकड़ों को सही तरीके से सार्वजनिक नहीं किया। जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी के कुल समेकित राजस्व का लगभग 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी यूनिट्स से आया, लेकिन उससे जुड़े आवश्यक दस्तावेज और खुलासे नहीं किए गए।

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    कंपनी और प्रमोटर पर कार्रवाई

    SEBI ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कंपनी और उसके चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता को फिलहाल सिक्योरिटीज मार्केट से दूर रहने का निर्देश दिया है। साथ ही कंपनी को फॉरेंसिक ऑडिट और जांच में पूरा सहयोग करने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद बाजार में कंपनी को लेकर नकारात्मक माहौल बन गया।

    शेयर बाजार में भारी गिरावट

    SEBI की कार्रवाई का असर सीधे कंपनी के शेयरों पर दिखाई दिया। Rajesh Exports का शेयर लगातार दो दिन 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की, जिससे कंपनी का मार्केट कैप तेजी से घटा। कई ब्रोकरेज और मार्केट एक्सपर्ट्स ने भी फिलहाल इस शेयर में सावधानी बरतने की सलाह दी है।

    कंपनी ने आरोपों को बताया गलत

    Rajesh Exports के चेयरमैन राजेश मेहता ने SEBI के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि रेगुलेटर ने केवल स्टैंडअलोन आंकड़ों को देखा और समेकित राजस्व को नजरअंदाज किया। कंपनी का दावा है कि Valcambi SA जैसी यूनिट्स बड़े स्तर पर गोल्ड रिफाइनिंग करती हैं, इसलिए उनका रेवेन्यू स्वाभाविक रूप से बहुत अधिक है। कंपनी ने इस पूरे मामले को कम्युनिकेशन गैप और गलतफहमी का परिणाम बताया है।

    PLI योजना और MCA जांच पर खतरा

    मामला बढ़ने के बाद अब केंद्र सरकार भी सतर्क हो गई है। खबर है कि भारी उद्योग मंत्रालय कंपनी का PLI (Production Linked Incentive) लाभ वापस ले सकता है। वहीं कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) द्वारा भी कंपनी के खिलाफ अलग से जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे कंपनी की कारोबारी साख पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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    निवेशकों की बढ़ी चिंता

    इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ी चिंता निवेशकों को लेकर है। रिपोर्ट्स के अनुसार LIC समेत कई बड़े संस्थागत निवेशकों की कंपनी में हिस्सेदारी है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो इसका असर लंबे समय तक कंपनी और उसके शेयर पर रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर SEBI की अगली कार्रवाई और कंपनी के जवाब पर टिकी हुई है।

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