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संगमेश्वर महादेव मंदिर अरूणाय में मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न हुआ 12 ज्योतिर्लिंग स्थापना कार्यक्रम

पिहोवा। श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में 12 ज्योतिर्लिंग स्थापना समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी के मार्गदर्शन में महामंडलेश्वर...

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संगमेश्वर महादेव मंदिर अरूणाय में मंत्रोच्चारण के बीच संपन्न हुआ 12 ज्योतिर्लिंग स्थापना कार्यक्रम

पिहोवा। श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में 12 ज्योतिर्लिंग स्थापना समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी के मार्गदर्शन में महामंडलेश्वर महंत विद्या गिरी, महंत विश्वनाथ गिरी, महंत बंसी पुरी और महंत भीम पुरी सहित संत महात्माओं ने विधिवत रूप से कार्यक्रम को संपन्न कराया। मंदिर सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि 12 ज्योतिर्लिंग स्थापना अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। ज्योतिर्लिंग स्थापना यजमान के रूप में सुमित जिंदल, प्रवीण कुमार तरावड़ी, साहिल जिंदल, नंदलाल सिंगला, सूरजभान चीका, सुखविंदर राणा, अमन जिंदल, अशोक जिंदल, सचिन कुमार नाभा, जेपी गोयल, अंकित जैन मलेरकोटला आदि ने परिवार सहित हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में पहुंचकर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र एवं दिव्य माना गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रमुख स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से ज्योतिर्लिंगों की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
ज्योतिर्लिंग पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महंत धीरज पुरी ने कहा कि ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उस दिव्य स्वरूप का प्रतीक है, जिसमें उन्हें अनंत प्रकाश एवं चेतना के रूप में पूजा जाता है। सावन एवं शिव आराधना के पवित्र अवसर पर एक ही स्थान पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन का अवसर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना भारतीय सनातन परंपरा में आत्मशुद्धि, संयम, सेवा और कल्याण का संदेश देती है। इस अवसर पर स्वामी लक्ष्मी नारायण पुरी, प्रबंधक सेवादल भूषण गौतम, पुरोहित पंडित कमलकांत गौतम, पंडित शंभू दत्त गौतम, पंडित सतीश शास्त्री, प्रधान रमणीक सिंगला, वंश गौतम, यज्ञदत्त शर्मा आदि सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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