| 🌡️ दिल्ली 38°C
Trending News
(970*50)
Hindi News / Breaking News

संगमेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार कर रही प्रयास: सुमन सैनी

श्रावण मास की त्रयोदशी पर 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया भोलेनाथ का जलाभिषेक, आज शिव चौदस को भी पूरा दिन अर्पित होगा जलपिहोवा. श्रावण मास की शिवरात्रि के अवसर पर  संगमेश्वर महादेव मंदिर...

ADVERTISEMENT (795*150)
<span class="title-highlight-color">संगमेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार कर रही प्रयास:</span> सुमन सैनी

श्रावण मास की त्रयोदशी पर 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया भोलेनाथ का जलाभिषेक, आज शिव चौदस को भी पूरा दिन अर्पित होगा जल

पिहोवा. श्रावण मास की शिवरात्रि के अवसर पर  संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में मंगलवार को 2 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। जिन्होंने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। इस दौरान लगे मेले में मुख्यमंत्री नायब सैनी की पत्नी सुमन सैनी,जय भगवान शर्मा डीडी सहित मेले पंजाब, हिमाचल, दिल्ली आदि से दो लाख शिव भक्त पहुंचे।
सुमन सैनी ने कहा कि संगमेश्वर महादेव मंदिर लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है। यहां पहुंचने वाले लोगों को सुविधा मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी के प्रयास से सरकार द्वारा मंदिर तक जाने वाली सड़क को फोरलेन बनाने का कार्य शुरू किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट पर दो करोड रुपए से अधिक का खर्च आएगा। फोरलेन करने के साथ-साथ सड़क के बीच में डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट भी लगाई जाएगी। साथ ही छज्जुपुर रोड से वाया राजबाहा एनएच 152 तक सड़क निर्माण को लेकर मंदिर की ओर से डिमांड दी गई है। जिसे जल्द पूरा करवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रियों की भीड़ को देखते हुए मंदिर से छज्जूपुर की तरफ जाने वाले रोड को चौड़ा करने का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके साथ-साथ एनएच 152 अंबाला हिसार रोड से बिलोचपुरा की तरफ वाया ड्रेन पटरी नई सड़क बनाकर मंदिर को बिलोचपुरा की साइड से भी कनेक्टिविटी दी गई है।उन्होंने भगवान भोलेनाथ का पूजन और अभिषेककरके सभी प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद कृष्णा हॉल के पीछे सुमन सैनी द्वारा पौधारोपण भी किया गया। इस मौके पर उनके साथ जय भगवान शर्मा डीडी, जिलाध्यक्ष रमेश सैनी, जिप चेयरपर्सन कंवलजीत कौर, भाजपा महिला मोर्चा की मंडलाध्यक्ष गीता शर्मा, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अवनीत वड़ैच व मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी सहित कई लोग मौजूद रहे ।

आज शिव चौदस को भीपूरा दिन होगा जलाभिषेक : महंत
बुधवार शिव चौदस के दिन भी एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि देर रात्रि भगवान भोलेनाथ का भस्माभिषेक किया गया। संगमेश्वर मंदिर सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम के मुताबिक सोमवार रात 12 बजे से मंदिर में संगमेश्वर महादेव पर जल चढ़ना शुरू हो गया था। लाइनों में लगाकर श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचाया गया। लाइन में ही पानी और भोजन की व्यवस्था भी की गई है। महिलाओं की लाइनों को पहली बार संगमेश्वर मंदिर सेवादल की महिला विंग ने संभाला। कांवडियों, दिव्यांगजनों और बुजुर्ग लोगों के लिए जल चढ़ाने की अलग से व्यवस्था की गई।

25 अगस्त को निकाली जाएगी शोभायात्रा

सेवा दल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि हर साल सावन मास में मंदिर की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इसमें संगमेश्वर महादेव को नगर का भ्रमण कराया जाता है। साथ ही पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा और रुद्राभिषेक करके सरस्वती तीर्थ में विसर्जित करते हैं। इस बार शोभायात्रा 25 अगस्त को निकाली जाएगी। उसके बाद 27 अगस्त को श्रावण समाप्ति का भंडारा होगा।

दीमक की बांबी की मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा

मंदिर में पूरे सावन मास में पार्थेश्वर शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया जा रहा है। पूरे उत्तर भारत से श्रद्धालु पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा करने आते हैं। इस पार्थेश्वर शिवलिंग को दीमक की बांबी की मिट्टी से बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद शिवलिंग को मंदिर परिसर में बने सरोवर में विसर्जित किया जाता है।

कालसर्प दोष से मिलती है मुक्ति

पंडित सतीश शर्मा ने बताया कि 17 अगस्त को नाग पंचमी पर सामूहिक रूप से कालसर्प दोष निवारण पूजा होगी। इसके साथ प्रतिदिन पार्थेश्वर पूजन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले भगवान राम ने त्रेतायुग में पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा की थी। रावण से युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए श्रीराम ने बालू की मिट्टी से पार्थेश्वर शिवलिंग का निर्माण किया था। यह शिवलिंग रामेश्वरम के नाम से जाना जाता है।

स्वयंभू हैं संगमेश्वर महादेव

महंत धीरज पुरी ने बताया कि संगमेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। पुराने समय में महात्मा गणेश गिरि को घास के बीच एक दीमक का ढ़ेर दिखाई दिया। उन्होंने अपने चिमटे से इस ढेर को कुरेदा तो उनका चिमटा किसी ठोस चीज से टकराया। उन्होंने मिट्टी को हटाकर देखा तो उन्हें यहां बड़ा सुंदर और तेजस्वी शिवलिंग दिखाई दिया। उन्होंने शिवलिंग को किसी सही स्थान पर स्थापित करने के लिए चिमटे से खोदकर उठाना चाहा। लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। जितना गहरा खोदते रहे, भगवान का स्वरूप उतना विशाल होता रहा। रात्रि में स्वप्न में भगवान ने दर्शन देकर बाबा को खुदाई बंद करके इस स्थान पर स्थापित रहने का आदेश दिया। इसके बाद से महादेव को यहां स्वयंभू लिंग के रूप में पूजा जाता है ।

तीन नदियों के संगम से बना संगमेश्वर

संगमेश्वर धाम अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी के संगम से बना है। महाभारत, वामन, गरुड़, स्कंद और पद्म पुराण में वर्णित कथाओं में इसका प्रमाण मिलता है। भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए महर्षि दुर्वासा ने 88 हजार साल तक स्थान पर तपस्या की थी। माना जाता है कि तभी से भगवान यहां लिंग रूप में विराजमान हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संबंधित खबरें