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जवान रहना है तो इश्क करो…

इश्क का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ही फिल्म चलती है - एक लड़का, एक लड़की, पार्क में बैठे हैं, हाथों में हाथ है और बैकग्राउंड में वायलिन बज रहा है। हमने इश्क...

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जवान रहना है तो इश्क करो…

इश्क का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ही फिल्म चलती है – एक लड़का, एक लड़की, पार्क में बैठे हैं, हाथों में हाथ है और बैकग्राउंड में वायलिन बज रहा है। हमने इश्क को इतना छोटा, इतना सीमित कर दिया है कि वो सिर्फ दो इंसानों के बीच का किस्सा बनकर रह गया है।

पर क्या इश्क सिर्फ इतना ही है?

इश्क का असली मतलब है – किसी चीज़ में इस कदर डूब जाना कि भूख-प्यास, वक्त, दुनिया सब भूल जाए। खुद को मिटा कर किसी और चीज़ में बस जाना। और जब ये इश्क किसी इंसान से होता है, तो अक्सर तकलीफ देता है। इंसान बदल जाता है, मजबूर हो जाता है, दूर चला जाता है। आपका दिल टूट जाता है।

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लेकिन एक इश्क ऐसा भी है जो कभी दिल नहीं तोड़ता, कभी बूढ़ा नहीं होने देता, कभी साथ नहीं छोड़ता। वो है – अपने शौक से इश्क।

तो बस जवान रहना है तो इश्क करो, पर किसी व्यक्ति से नहीं, अपने किसी शौक से। अपने passion और happiness को जिंदगी का हिस्सा बनाइए। कई बार happy life का secret किसी रिश्ते में नहीं, बल्कि उस काम में छिपा होता है जिसे करने में आपको सच्ची खुशी मिलती है।

  1. संगीत से इश्क करो – जो कभी बेवफा नहीं होता

जिसने सुरों से इश्क किया है, वो कभी अकेला नहीं रहा। आप लता मंगेशकर जी को देखिए, पंडित भीमसेन जोशी जी को देखिए, 80-90 साल की उम्र में भी उनके गले में, उनके रियाज़ में वही जवानी थी। क्यों? क्योंकि उनका इश्क किसी इंसान से नहीं, सात सुरों से था।

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आपको गायक बनने की जरूरत नहीं है। बस संगीत को अपना दोस्त बना लीजिए। सुबह उठते ही कोई पसंदीदा गीत सुन लीजिए – या फिर रेडियो पर गीतों का आनंद लीजिए। शाम को थक कर आएं तो किचन में ही कोई ग़ज़ल लगा कर सुन लीजिए, कोई धुन गुनगुना लीजिए, सोफे पर बैठकर आंखें मूंदकर एक कप चाय के साथ किसी ग़ज़ल में डूब जाइए। रात को सोते वक्त धीमा-धीमा कोई गीत अपने पास बजने दीजिए।

मन करे तो एक साज़ सीख लीजिए। हारमोनियम, गिटार, बांसुरी या सिर्फ एक छोटी सी बांस की मुरली। जब आपकी उंगलियां पहली बार सही सुर निकालेंगी, तो जो खुशी मिलेगी वो किसी प्रेमी के दीदार से कम नहीं होगी।

संगीत वो महबूब है जो आपको रोने भी देगा और बिना एक शब्द कहे आपका मन हल्का भी कर देगा। यही वजह है कि music और mental peace का रिश्ता इतना खूबसूरत है।

अगर आप सोच रहे हैं कि संगीत और किताबों से मानसिक खुशी कैसे मिल सकती है, तो जवाब बहुत सरल है – इन दोनों के साथ बिताया गया समय आपको कुछ देर के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ से बाहर निकालकर अपने भीतर लौटने का मौका देता है।

  1. किताबों और कहानियों से इश्क करो – एक जीवन में हजार जीवन जियो

किताबों से इश्क करने वाला इंसान कभी गरीब नहीं होता। उसके पास एक ही जीवन में हजार जिंदगियां होती हैं। वो कभी प्रेमचंद के गोदान वाले होरी के साथ खेत में रोता है, तो कभी मुंशी जी की ही कहानियों में गुदगुदाता भी है। कभी महादेवी वर्मा की कविताओं में खो जाता है, तो कभी ओशो की किताबों में जिंदगी का मतलब ढूंढता है। और कभी किसी शायर की दर्द या प्रेम भरी ग़ज़ल में ऐसा डूबता है कि न जाने कितने ही बीते पल ताजा हो जाते हैं।

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आज हम शाम होते ही मोबाइल स्क्रॉल करने लगते हैं। आधा घंटा, एक घंटा, पता ही नहीं चलता और आंखें थक जाती हैं, मन खाली-खाली लगता है।

वही आधा घंटा किताब को दे दीजिए। नए पन्नों की, स्याही की वो महक, पन्ने पलटने की वो सरसराहट… ये भी इश्क की ही तो आहट है।

धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपके चेहरे पर उम्र की लकीरें भले हों, पर आपकी आंखों में अभी भी एक 18 साल के युवा जैसी चमक और जिज्ञासा बाकी है। किताबों वाला इश्क आपको कभी बोर नहीं होने देगा। भीड़ में भी आप अकेले नहीं लगेंगे।

किताबें पढ़ना उन hobbies for happiness में शामिल है जिन्हें उम्र के किसी भी पड़ाव पर अपनाया जा सकता है। एक अच्छी किताब आपको नई दुनिया से मिलाती है और जीवन के प्रति आपकी जिज्ञासा को जिंदा रखती है।

  1. नृत्य से इश्क करो – अपने शरीर से कहो, मैं जिंदा हूं

नाचना सिर्फ स्टेज पर परफॉर्म करना नहीं है। नाचना अपने आप से मिलना है। नाचना अपने शरीर से ये कहना है कि “देख, मैं अभी भी जवान हूं, मेरे जोड़ अभी भी हिल सकते हैं।”

आपको कथक या भरतनाट्यम नहीं आता तो क्या हुआ? कोई आपको जज करने नहीं आ रहा। कमरा बंद कीजिए, अपना सबसे पसंदीदा गाना चलाइए, वो चाहे 60-90 के दशक का कोई प्यार भरा नगमा हो या आज का कोई पंजाबी बीट। और बस… बह जाइए।

पसीना आएगा, सांस थोड़ी फूलेगी, पर आईने में जो चेहरा दिखेगा वो थका हुआ नहीं, खिला हुआ होगा। आपके गालों पर जो लाली आएगी वो किसी महंगे ब्लश से नहीं, जिंदगी के उन हसीन पलों से आएगी।

डांस वो इश्क है जो आपके मन को हल्का कर सकता है और जिंदगी में उत्साह भर सकता है। यही तो stay young वाली सोच है – उम्र को रोकना नहीं, बल्कि हर उम्र में जिंदगी को पूरे उत्साह के साथ जीना।

अगर मन में सवाल आए कि जवान रहने के लिए क्या करें, तो जवाब सिर्फ चेहरे या शरीर की उम्र छिपाने में नहीं है। अपने भीतर उत्साह, जिज्ञासा और जिंदगी के प्रति प्रेम को जिंदा रखना भी उतना ही जरूरी है।

  1. लिखने, पेंट करने और बुनने वाले इश्क से इश्क करो

कुछ लोग बोल कर हल्के होते हैं, कुछ लोग लिख कर। अगर आपके अंदर बहुत सारी बातें भरी हैं जो आप किसी से कह नहीं पाते, तो कलम से इश्क कर लीजिए।

रोज सिर्फ चार लाइनें लिखिए। कभी वो डायरी बन जाएगी, कभी शायरी, कभी एक कहानी तो कभी कविता। लिखना अपने आप से बात करने का सबसे खूबसूरत तरीका है।

नहीं, तो रंगों से इश्क कर लीजिए। आपको मकबूल फिदा हुसैन बनने की जरूरत नहीं है। एक सस्ता सा स्केच बुक लाइए, कुछ रंग लाइए। बस मन जो कहे वो बना दीजिए। कभी-कभी आड़ी-तिरछी लकीरें भी दिल को इतना सुकून देती हैं जितना कोई इंसान नहीं दे पाता।

कुछ लोगों का इश्क बागवानी से होता है। एक बीज को पौधा बनते देखना, उसमें पहली कली आते देखना… ये खुशी किसी भी ब्रेकअप के गम से बड़ी है।

लेखन, चित्रकारी, बागवानी और संगीत जैसी creative hobbies हमें अपनी रचनात्मकता से जोड़ती हैं। यही छोटे-छोटे शौक जिंदगी में खुशी और उत्साह बनाए रखने का माध्यम बन सकते हैं।

शौक वाला इश्क आपसे कुछ नहीं मांगता

इस इश्क की सबसे खूबसूरत बात क्या है, जानते हैं?

इंसानों वाला इश्क आपसे वक्त मांगता है, सफाई मांगता है, वफादारी का सबूत मांगता है। और फिर भी कई बार वो आपको बीच रास्ते में अधूरा छोड़ देता है।

पर शौक वाला इश्क आपसे कुछ नहीं मांगता।

आप उसे 10 दिन बाद भी मिलेंगे तो वो वहीं मिलेगा, नाराज नहीं होगा। आप थके-हारे लौटेंगे तो वो आपको डांटेगा नहीं, संभालेगा। आप उदास होंगे तो वो बिना वजह पूछे आपका मूड ठीक कर देगा। वो कभी धोखा नहीं देगा, कभी ये नहीं कहेगा कि “अब तुममें पहले जैसी बात नहीं रही।”

यही hobbies for happiness की खूबसूरती है। शौक किसी दूसरे इंसान पर आपकी खुशी की निर्भरता कम करता है और आपको अपने भीतर खुशी तलाशना सिखाता है।

इसलिए अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा क्यों बनाएं, इसका सबसे खूबसूरत जवाब यही है कि शौक हमें खुद से जोड़े रखते हैं। जब जिंदगी में बाकी चीजें बदलती रहती हैं, तब कोई पसंदीदा काम, कला या रुचि हमारे भीतर निरंतरता बनाए रख सकती है।

जवानी उम्र से नहीं, जिंदादिली से आती है।

जरा गौर कीजिएगा, जिन लोगों को आप 60-65 साल की उम्र में भी जवान देखते हैं न… जिनकी आंखों में एक अलग ही चमक होती है, जो हर महफिल में सबसे ज्यादा जिंदादिल लगते हैं… उनका पक्का किसी न किसी शौक से गहरा इश्क चल रहा होता है।

कोई सुबह 4 बजे उठकर रियाज़ कर रहा है, कोई रात को 12 बजे तक किताब में डूबा है, कोई अपने छोटे से गार्डन में पौधों से बातें कर रहा है। तो कोई सुबह पार्क में जाकर ठंडी हवा का आनंद ले रहा है।

इन लोगों के लिए उम्र जिंदगी की सीमा नहीं होती। वे अपने positive lifestyle और पसंदीदा गतिविधियों के साथ हर दिन को नए उत्साह से जीते हैं।

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उम्र बढ़ना जिंदगी का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन हर उम्र में उत्साह, जिज्ञासा और खुशी को बनाए रखना संभव है। यही सोच healthy aging को भी एक खूबसूरत अर्थ देती है – सिर्फ लंबी उम्र नहीं, बल्कि जिंदगी को जिंदादिली के साथ जीना।

अगर आपके मन में सवाल है कि बुढ़ापे में खुद को जवान कैसे रखें, तो इसका जवाब किसी चमत्कार में नहीं, बल्कि जीवन के प्रति अपने नजरिए में छिपा है। सीखते रहिए, पढ़ते रहिए, संगीत सुनिए, नृत्य कीजिए, लिखिए, पौधे लगाइए और सबसे जरूरी – अपने पसंदीदा शौक के लिए समय निकालिए।

इसीलिए तो कहते हैं, जवानी उम्र से नहीं आती। जवानी आती है इश्क से।

और अगर इश्क करना ही है तो ऐसे शौक से करो जो तुम्हें कभी बूढ़ा न होने दे।

जिंदगी में खुशी का रास्ता अपने शौक से होकर भी जाता है

life में happiness पाने के लिए हमेशा किसी बड़ी उपलब्धि या बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। कई बार खुशी उन छोटी-छोटी चीजों में छिपी होती है जिन्हें हम जिम्मेदारियों और भागदौड़ के बीच पीछे छोड़ आए हैं।

अगर कोई पूछे कि उम्र बढ़ने के बाद खुश कैसे रहें, तो शायद इसका कोई एक फार्मूला नहीं है। लेकिन अपने लिए समय निकालना, पसंदीदा काम करना, लोगों से जुड़ना और अपने भीतर की जिज्ञासा को जिंदा रखना जिंदगी को ज्यादा खूबसूरत जरूर बना सकता है।

इसी तरह जिंदगी में खुशी कैसे बनाए रखें, इसका जवाब भी कई बार हमारे अपने शौक में छिपा होता है। जरूरी नहीं कि शौक बहुत बड़ा हो। आधे घंटे किताब पढ़ना, कोई धुन सुनना, पौधों की देखभाल करना या चार लाइन लिखना भी आपके दिन को बदल सकता है।

तो आज, अभी, इसी वक्त एक वादा खुद से कीजिए। एक पुराने शौक को फिर से जिंदा कीजिए, या एक नए शौक को अपना महबूब बना लीजिए। दुनिया क्या कहेगी, लोग हंसेंगे… इसकी परवाह मत कीजिए।

क्योंकि अंत में, जब सब कुछ साथ छोड़ देगा, तो यही एक इश्क आपके कंधे पर हाथ रखकर कहेगा –

“घबराना मत, तू अभी भी जवान है, मेरे दोस्त।
चल थक कर मत बैठ,
आ दोनों साथ में कुछ पल जियें।”

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