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लोकतंत्र, युवाओं और राष्ट्रवाद पर बोले Sunil Ambekar, बयानों से फिर गरमाई सियासत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख Sunil Ambekar एक बार फिर अपने हालिया बयानों को लेकर चर्चा में हैं। नागपुर, दिल्ली और केरल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने...

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लोकतंत्र, युवाओं और राष्ट्रवाद पर बोले Sunil Ambekar, बयानों से फिर गरमाई सियासत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख Sunil Ambekar एक बार फिर अपने हालिया बयानों को लेकर चर्चा में हैं। नागपुर, दिल्ली और केरल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने लोकतंत्र, युवाओं की सोच, भारत के विभाजन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उनके बयानों के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।

लोकतंत्र में हर विचार के लिए जगह

हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर पूछे गए सवाल पर सुनील आंबेकर ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और नई राजनीतिक चर्चाएं होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि यहां हर आवाज़ को सुना जाता है।

आंबेकर ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z भारत और उसके लोकतांत्रिक ढांचे पर पूरा भरोसा करती है। उनके अनुसार युवा संविधान के दायरे में रहकर बदलाव चाहते हैं और देश के भविष्य को लेकर आशावादी हैं।

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बंगाल में RSS की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र

अपने संबोधन में सुनील आंबेकर ने पश्चिम बंगाल में RSS की ऐतिहासिक उपस्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ के सभी छह सरसंघचालकों ने किसी न किसी समय बंगाल में काम किया है।

उन्होंने कहा कि बंगाल लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक गतिविधियों का केंद्र रहा है और RSS ने वहां सामाजिक स्तर पर लगातार काम किया है। राजनीतिक जानकार इसे बंगाल में संगठन के विस्तार की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

अगर RSS मजबूत होता तो विभाजन नहीं होता

सुनील आंबेकर ने भारत विभाजन को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि 1947 में RSS अधिक मजबूत स्थिति में होता, तो शायद देश का विभाजन नहीं होता।

उन्होंने दावा किया कि विभाजन के समय संघ के स्वयंसेवकों ने राहत और सुरक्षा कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस बयान पर कई राजनीतिक दलों ने प्रतिक्रिया दी और इसे इतिहास की नई व्याख्या बताया।

सामाजिक एकता और भाषाई विवाद पर प्रतिक्रिया

UGC नियमों और भाषा विवाद को लेकर पूछे गए सवालों पर आंबेकर ने कहा कि RSS समाज की एकता को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय महत्व रखती हैं और विविधता ही देश की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने यह भी कहा कि संगठन समाज को जोड़ने में विश्वास रखता है और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर दिया जोर

केरल में आयोजित एक कार्यक्रम में सुनील आंबेकर ने कहा कि RSS पिछले 100 वर्षों से सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से राष्ट्र को मजबूत बनाना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि RSS अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर युवाओं और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी विचारधारा को और व्यापक स्तर पर पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।

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