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संस्कृत के बिना आयुर्वेद का मूल स्वरूप अधूरा : प्रो. सतीश गंधर्व

पंचकूला। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की शृखंला में संस्कृत दिवस-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने दीप प्रज्वलन...

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<span class="title-highlight-color">संस्कृत के बिना आयुर्वेद का मूल स्वरूप अधूरा :</span> प्रो. सतीश गंधर्व
पंचकूला। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की शृखंला में संस्कृत दिवस-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती का पूजन कर किया।

आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों ने आयुर्वेद के मूल ग्रंथों की भाषा संस्कृत को सहेजने का संकल्प लिया।

डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। संस्कृत के बिना आयुर्वेद का मूल स्वरूप अधूरा है। इसलिए संस्कृत में समाहित आयुर्वेद का ज्ञान-विज्ञान, संरक्षण और संवर्धन जरूरी है।

आयुर्वेद के अनेक मूल एवं प्रामाणिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में रचित हैं। ऐसे में आयुर्वेद के सिद्धांतों, चिकित्सा पद्धतियों और भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन महत्वपूर्ण है।

प्रोफेसर गंधर्व ने कहा कि संस्कृत में केवल साहित्य, धर्म और अध्यात्म ही नहीं, बल्कि मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी है। सर्वे भवन्तु सुखिन: के माध्यम से सभी के सुख और कल्याण की कामना की गई है। इसके साथ ही, वसुधैव कुटुम्बकम पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भावना को मजबूत करता है।

उन्होंने संस्कृत दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, साहित्य, दर्शन और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने के प्रयास का आह्वान किया।

असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रमोहन द्वारा कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त करते हुए बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से आयुर्वेद के मूल ग्रन्थों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के आधारभूत माध्यम के रूप में संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया गया तथा इसके अध्ययन, संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष पमनानी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा राणा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुराग कुशल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धवल मकवाना, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकिता नेगी, असिस्टेंट प्रोफेसर महेश एम, चिकित्सा अधिकारी शीन्षा पी तथा बीएएमएस के विद्यार्थी मौजूद रहे।

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