
सोनीपत। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में Law, Media और उनके मध्य का संवाद” विषय पर एक विशेष संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें देश के वरिष्ठ पत्रकारों, विधिक संपादकों और मीडिया विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को Law और Media के बदलते संबंधों, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका और विधिक पत्रकारिता के महत्व से अवगत कराना था।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। यह आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) देविंदर सिंह के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। वहीं कुलसचिव प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार के संवादात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र विकास और समसामयिक विषयों की समझ को मजबूत करते हैं।
Law और Media के बीच बेहतर संवाद जरूरी
प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल विधिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, अभिव्यक्ति क्षमता और विश्लेषणात्मक सोच को विकसित करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि Law और Media दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इनके बीच बेहतर समझ विकसित करना आज के समय की आवश्यकता बन चुका है।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं विधिक विशेषज्ञ संदीप फुकन, पवन शर्मा, सत्य प्रकाश, जतिन गांधी, सत सिंह, नीरज मोहन और मुकेश टंडन ने बतौर वक्ता भाग लिया। वक्ताओं ने न्यायालय से समाचार स्तंभ तक, विधिक लेखन, Media विधि लेखन और कानून और मीडिया के संबंध जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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स्वतंत्र मीडिया को बताया लोकतंत्र का प्रहरी
वरिष्ठ विधिक संपादक सत्य प्रकाश ने कहा कि न्यायपालिका जहां सत्य की खोज करती है, वहीं मीडिया लोकतंत्र का प्रहरी बनकर समाज और शासन के बीच सेतु का कार्य करता है। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही, मीडिया की स्वतंत्रता और संवेदनशील मामलों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर विशेष जोर दिया।
वहीं जतिन गांधी ने मीडिया और पत्रकारिता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि विज्ञापन आधारित मीडिया व्यवस्था समाचारों की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर रही है। उन्होंने पत्रकारिता में नैतिकता, तथ्य-जांच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया तथा विद्यार्थियों को समाचार लेखन की 5 डब्ल्यू और 1 एच पद्धति समझने की सलाह दी।
सरल भाषा में कानून पहुंचाने पर जोर
वरिष्ठ पत्रकार संदीप फुकन ने कहा कि कानूनी भाषा को आम नागरिकों के लिए सरल और सुलभ बनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जब कानूनों और अधिकारों की जानकारी सरल भाषा में समाज तक पहुंचती है, तभी वास्तविक लोकतांत्रिक जागरूकता विकसित होती है।
विराम के बाद नीरज मोहन ने कानून और समाज के बीच मौजूद दूरी पर चर्चा करते हुए कहा कि मीडिया इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कानून और मीडिया की तुलना “पति-पत्नी” से करते हुए सत्य को दोनों की साझा जिम्मेदारी बताया। वहीं सत सिंह ने विधिक रिपोर्टिंग के बढ़ते दायरे और पत्रकारिता में व्यावसायिक नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रहा सत्र
समापन वक्तव्य में मुकेश टंडन ने कहा कि वकील और पत्रकार दोनों जीवनभर सीखते रहते हैं। उन्होंने जिम्मेदार और सटीक रिपोर्टिंग के लिए कानूनी जागरूकता को आवश्यक बताया। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने विधिक पत्रकारिता, मीडिया नैतिकता, इंटर्नशिप और डिजिटल मीडिया के भविष्य से जुड़े सवाल पूछे।
अंत में सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और समसामयिक मुद्दों पर सार्थक संवाद का प्रभावी मंच साबित हुआ।

