नई दिल्ली | भारतीय डाक विभाग (Department of Posts) ने अपने राजस्व में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,100 करोड़ की अतिरिक्त राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जिसे पिछले चार दशकों की सबसे बड़ी ग्रोथ माना जा रहा है। अब सरकार का लक्ष्य इसे दोगुना करते हुए ₹4,000 करोड़ तक पहुंचाने का है। इस बदलाव को देश की डाक सेवाओं में एक बड़े ट्रांसफॉर्मेशन के रूप में देखा जा रहा है।
राजस्व में तेजी से सुधार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार Department of Posts का कुल राजस्व वित्त वर्ष 2024-25 के ₹13,218 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹15,296 करोड़ हो गया है। संचार राज्य मंत्री ने बताया कि यह वृद्धि केवल आंकड़ों में सुधार नहीं है, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार का परिणाम है। 2016 में जहां विभाग का राजस्व ₹11,500 करोड़ था, वहीं 2025 तक यह लगातार बढ़कर नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है।
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डिजिटल और जवाबदेही से आया बदलाव
विभाग में सुधार के पीछे सबसे बड़ा कारण डिजिटल तकनीक और सख्त लक्ष्य आधारित सिस्टम को माना जा रहा है। मंत्री के अनुसार हर स्तर पर लक्ष्य तय किए गए हैं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है और प्रदर्शन के आधार पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की गई है। इसी कारण विभाग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
डाकघरों को बनाया जा रहा प्रॉफिट सेंटर
सरकार का लक्ष्य अब पोस्ट ऑफिसों को केवल सेवा केंद्र नहीं, बल्कि प्रॉफिट सेंटर बनाना है। इसके लिए नए बिजनेस मॉडल और इनोवेशन पर जोर दिया जा रहा है। 24 घंटे और 48 घंटे स्पीड पोस्ट डिलीवरी, OTP आधारित ट्रैकिंग और रियल टाइम अलर्ट जैसी सेवाओं ने ग्राहकों का अनुभव बेहतर किया है।
प्राइवेट कंपनियों से मुकाबले की तैयारी
निजी कूरियर कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए Department of Posts ने कई बड़े बदलाव किए हैं। देश के 214 डाकघरों में 24 घंटे सेवा शुरू की गई है, जबकि करीब 4,000 डाकघरों के कार्य समय को बढ़ाया गया है। इससे ग्राहकों को ऑफिस समय के बाद भी सेवाएं मिल पा रही हैं।
सेवा सुधार और तकनीक का इस्तेमाल
डिजिटल तकनीक के उपयोग से न केवल सेवाओं की गति बढ़ी है, बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। ट्रैकिंग सिस्टम, ई-नोटिफिकेशन और शिकायत निवारण प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। इससे ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ा है और शिकायतों में कमी आई है।
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भविष्य की रणनीति
सरकार का लक्ष्य अगले तीन से चार वर्षों में Department of Posts को पूरी तरह आधुनिक और प्रतिस्पर्धी सेवा प्रदाता बनाना है। इसके लिए लगातार इनोवेशन, तकनीकी अपग्रेड और सेवा विस्तार पर काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रणनीति सफल रही तो डाक विभाग देश की सबसे मजबूत लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी नेटवर्क में शामिल हो सकता है।
भारतीय डाक विभाग अब केवल पत्राचार की पुरानी पहचान से आगे बढ़कर एक आधुनिक, डिजिटल और प्रतिस्पर्धी सेवा संस्थान बनता जा रहा है। ₹4,000 करोड़ के रेवेन्यू लक्ष्य के साथ यह बदलाव देश की सार्वजनिक सेवाओं में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।


