नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित क्लबों में शामिल Delhi Gymkhana Club इन दिनों बड़े विवाद के केंद्र में है। केंद्र सरकार द्वारा क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद मामला अब कानूनी और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। इसी बीच हरियाणा कैडर के पूर्व IAS अधिकारी Ashok Khemka की एंट्री ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है। खेमका ने खुलकर केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है और इसे साहसिक कदम बताया है।
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पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दिल्ली जिमखाना क्लब जिस जमीन पर स्थित है, उसकी कीमत 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी कीमती सरकारी जमीन कुछ चुनिंदा अभिजात्य लोगों के सामाजिक क्लब के लिए इस्तेमाल होती रहनी चाहिए। खेमका ने कहा कि सरकार ने क्लब की लीज खत्म कर बड़ा कदम उठाया है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार एलीट दबाव के सामने टिक पाएगी।
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली जिमखाना क्लब को नोटिस जारी कर 27.3 एकड़ की जमीन 5 जून तक खाली करने को कहा है। सरकार का कहना है कि यह जमीन राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि यह इलाका प्रधानमंत्री आवास और अन्य संवेदनशील सरकारी परिसरों के बेहद करीब स्थित है, इसलिए इसे सार्वजनिक हित में वापस लिया जा रहा है।
दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1913 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। क्लब की सदस्यता हासिल करना बेहद मुश्किल माना जाता है और कई लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। क्लब में देश के बड़े नौकरशाह, उद्योगपति, सैन्य अधिकारी और प्रभावशाली लोग सदस्य रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच क्लब प्रबंधन और सदस्य अदालत पहुंच गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में क्लब की ओर से केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। हालांकि अदालत ने फिलहाल तत्काल राहत देने से इनकार किया है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई जबरन कब्जा नहीं लिया जाएगा।
विवाद के दौरान क्लब की वित्तीय स्थिति भी चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार क्लब के पास करोड़ों रुपये के निवेश और बड़ी संपत्तियां मौजूद हैं। वहीं सरकार ने दावा किया है कि क्लब पर लगभग 48 करोड़ रुपये का बकाया किराया भी है।
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अशोक खेमका की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोग सरकार के कदम को जनहित में फैसला बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे देश की ऐतिहासिक संस्थाओं पर कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद सिर्फ एक क्लब या जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देश में एलीट संस्कृति, सार्वजनिक जमीन के उपयोग और सरकारी अधिकारों पर बड़ी बहस का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की सुनवाई और केंद्र सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर टिकी रहेगी।


