हरियाणा में अंग्रेजी सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बड़ा झटका, 613 पदों के लिए केवल 151 उम्मीदवार हुए पास

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    हरियाणा में अंग्रेजी सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बड़ा झटका

    चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में अंग्रेजी सहायक प्रोफेसर के 613 पदों के लिए आयोजित विषय ज्ञान परीक्षा के परिणाम ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा घोषित नतीजों में केवल 151 उम्मीदवार ही परीक्षा पास कर सके हैं। परिणाम सामने आने के बाद अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उम्मीदवारों का कहना है कि हरियाणा के छात्र देशभर में यूपीएससी और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करते हैं, फिर भी इतने बड़े स्तर पर असफलता सवाल खड़े करती है।

    35 प्रतिशत अंक भी नहीं ला सके अधिकांश अभ्यर्थी

    एचपीएससी द्वारा आयोजित इस परीक्षा में उम्मीदवारों को 150 अंकों की वर्णनात्मक परीक्षा देनी थी, जिसमें पास होने के लिए न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक जरूरी थे। आयोग के अनुसार, 17 अगस्त को आयोजित अंतिम परीक्षा में 1,950 उम्मीदवार शामिल हुए थे, लेकिन उनमें से केवल 151 ही निर्धारित अर्हता अंक हासिल कर पाए। इस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत जून में स्क्रीनिंग टेस्ट से हुई थी, जिसमें 4,424 उम्मीदवार शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 2,000 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया था।

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    उम्मीदवारों ने उठाए मूल्यांकन पर सवाल

    परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। एक पीएचडी धारक उम्मीदवार ने बताया कि उसने स्क्रीनिंग टेस्ट में 100 में से 77 अंक प्राप्त किए थे, जबकि सामान्य वर्ग का कटऑफ 66 था। उम्मीदवार का कहना है कि अंग्रेजी में मास्टर डिग्री में 62 प्रतिशत अंक होने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा में असफल घोषित कर दिया गया।

    एक अन्य उम्मीदवार ने दावा किया कि उसने पोस्ट ग्रेजुएशन में 73 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे और स्क्रीनिंग टेस्ट में 72 अंक हासिल किए थे, फिर भी उसका चयन नहीं हुआ। उम्मीदवारों का आरोप है कि कई ऐसे अभ्यर्थी भी असफल हो गए, जिन्होंने स्क्रीनिंग टेस्ट में 90 से अधिक अंक प्राप्त किए थे। उन्होंने आयोग से उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने और मूल्यांकन प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है। कुछ उम्मीदवारों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की भी बात कही है।

    आरक्षित वर्गों में बेहद कम चयन

    इस भर्ती परीक्षा में आरक्षित वर्गों का प्रदर्शन भी बेहद कमजोर रहा। भर्ती कार्यकर्ता श्वेता ढुल ने कहा कि पिछड़ा वर्ग (ए) के लिए आरक्षित 85 पदों में केवल तीन उम्मीदवार ही सफल हुए हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित 60 सीटों में से केवल छह उम्मीदवार ही परीक्षा पास कर सके।

    पूर्व अधिकारी सतीश मेहरा ने बताया कि चयनित 151 उम्मीदवारों में से 136 सामान्य वर्ग से हैं। अनुसूचित जाति वर्ग की 60 सीटों में केवल एक उम्मीदवार सफल हुआ, जबकि अन्य अनुसूचित जाति वर्ग की 60 सीटों में से केवल दो उम्मीदवार ही उत्तीर्ण हो पाए। पिछड़ा वर्ग (बी) की 36 सीटों में केवल तीन उम्मीदवार सफल हुए हैं।

    एचपीएससी ने किया प्रक्रिया का बचाव

    विवाद बढ़ने के बीच एचपीएससी ने अपनी चयन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बताया है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मुख्य परीक्षा में 15 प्रश्न पूछे गए थे और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रत्येक प्रश्न का मूल्यांकन एक ही विशेषज्ञ द्वारा किया गया। अधिकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय परीक्षाओं के अंक या गोल्ड मेडल से अधिक महत्वपूर्ण उम्मीदवार का वास्तविक विषय ज्ञान है, जिसका आकलन लिखित परीक्षा से किया गया।

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    आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 2022 से वर्णनात्मक परीक्षा प्रारूप लागू किया गया है, जबकि कई प्रतियोगी परीक्षाएं अभी भी केवल बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित हैं। एचपीएससी के अनुसार, अंतिम चयन में मुख्य परीक्षा का वेटेज 87.5 प्रतिशत और इंटरव्यू का 12.5 प्रतिशत रखा गया है, जबकि स्क्रीनिंग टेस्ट केवल प्रारंभिक चयन के लिए था।

    सरकार ने कहा- चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी

    हरियाणा सरकार ने भी एचपीएससी की प्रक्रिया का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे ने कहा कि आयोग पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है। हालांकि, परिणामों को लेकर जारी विवाद और उम्मीदवारों की नाराजगी के बीच यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी रूप लेता दिखाई दे रहा है।

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