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POCSO मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने POCSO मामले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ दर्ज कार्रवाई पर अंतरिम...

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POCSO मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने POCSO मामले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ दर्ज कार्रवाई पर अंतरिम राहत देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में कई कानूनी पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है। अदालत के इस फैसले के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कुछ समय पहले POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक नाबालिग से जुड़े विवादित बयान और कथित गतिविधियों के कारण मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी।

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मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब कई धार्मिक संगठनों और संत समाज ने इसे शंकराचार्य की छवि खराब करने की साजिश बताया। वहीं दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम Court में सुनवाई के दौरान शंकराचार्य पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है और शिकायत के तथ्यों में कई विरोधाभास हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति होने के कारण उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि मामले में तत्काल कठोर कार्रवाई की आवश्यकता नहीं दिखती और अगली सुनवाई तक शंकराचार्य को राहत दी जाती है। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को भी निर्देश दिया कि कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष जांच की जाए।

संत समाज ने फैसले का किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद कई संतों और धार्मिक संगठनों ने खुशी जताई। विभिन्न अखाड़ों और हिंदू संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा है।

शंकराचार्य समर्थकों का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और अदालत के फैसले से सच्चाई सामने आने की उम्मीद बढ़ी है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थकों ने फैसले को “सत्य की जीत” बताया।

विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने कहा कि अदालत की राहत का मतलब यह नहीं है कि मामला खत्म हो गया है। उनका कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ होनी चाहिए, क्योंकि मामला POCSO कानून से जुड़ा है जो बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक सख्त कानून है।

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राजनीतिक दलों ने भी मामले पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। कई नेताओं ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका के फैसले का सम्मान है और जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए।

आगे क्या

अब इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में तय तारीख पर होगी। तब तक शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अंतरिम राहत मिली रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर देशभर की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यह मामला धर्म, कानून और सामाजिक संवेदनशीलता तीनों से जुड़ा हुआ है।

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