श्रावण की पूर्णिमा के पवित्र दिन रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है । वैसे तो यह भाई और बहन के बीच एक पवित्र , निःस्वार्थ और रक्षा के वचन का त्यौहार है । भाई को भोजन करा कर सुन्दर चौकी पर बिठाया जाता है । फिर बहन माथे पर रोली से तिलक कर कच्चे धागे से बने लाल पीले रंग के कलावर को या सुन्दर रक्षा सूत्र को भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर बांधती है और मुँह मीठा कराती है।
भाई अपनी बहन के राखी का मान रखते हुए रक्षा का वचन देता है और कोई वस्तु उपहार में देता है । इस त्यौहार का सम्बन्ध कई पौराणिक कथाओं से है जैसे भागवत पुराण के अनुसार देवताओं और राक्षसों के युद्ध के समय देवराज इंद्र की पत्नी ने इंद्र की रक्षा के लिए राक्षसों की कलाई पर श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षा सूत्र बांधा था ।
एक दूसरी कथानुसार वामन अवतार में भगवान् विष्णु राजा बलि की प्रार्थना पर पाताल लोक में चले गए थे । बाद में माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांध कर भाई बनाया और भगवान को वापस वैकुण्ठ ले गई । इसी प्रसंग का मन्त्र रक्षा बांधने के समय बोला जाता है ,येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल अर्थात जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था , उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता / बांधती हूँ !
तुम अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना , स्थिर रहना ।रक्षा करने का वचन कोई भी किसी को भी दे सकता है। इस दिन ब्राह्मण यजमान को , गुरुओं को और परिवार में कोई भी लड़की या स्त्री किसी भी पुरुष को राखी बांध सकती है। सूत्र का अर्थ बांधने की वस्तु से है , अतः यह किसी भी प्रकार का हो सकता है, जैसे कच्चे सूत का, मौली या कलावर का, रेशम का या फिर जरी गोटा का । मूल्य केवल भावना का है।
महाभारत काल में जब श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था तो सुदर्शन चक्र से भगवान् की ऊँगली कट गई थी । उसी समय द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ कर भगवान् की ऊँगली पर बांध दिया था और श्री कृष्ण ने द्रौपदी को रक्षा का वचन दिया था और समय आने पर उन्होंने अपने वचन को निभाया।
एक और कथा आती है कि यमुना जी ने अपने भाई यमराज को राखी बाँधी थी तो यमराज ने अपनी बहन को अमरता का वरदान दिया था । एक ऐतिहासिक कथा भी प्रचलित है की मेवाड़ की रानी कर्णावती (कर्मावती ) को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली तो लड़ने में असमर्थ होने के कारण उसने हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की।
हुमायूँ ने भी राखी की लाज रखी और बहादुरशाह से युद्ध कर मेवाड़ की रक्षा की । कदाचित इसी कारण से दूर रहने वाली बहनें अपने भाइयों को राखियां बाँध तो नहीं पाती हैं तो डाक सेवा द्वारा भेज देती हैं । सत्य स्वरुप श्री भगवान् ही सदैव सबकी रक्षा करते हैं अतः उन्हें राखी बांध कर स्त्रियां अपने भाई को राखी बांधने का अनुभव करती हैं।
भारत के उत्तराँचल में इसे श्रावणी कहते हैं । इस दिन यजुर्वेदी द्विजों का उपकर्म होता है। उत्सर्जन , स्नान -विधि , ऋषि तर्पणादि करके नवीन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है । वृत्तिवान ब्राह्मण अपने यजमानों को यज्ञोपवीत दे कर तथा राखी बांध कर दक्षिणा लेते हैं । अमरनाथ की यात्रा गुरु पूर्णिमा से आरम्भ हो कर श्रावण पूर्णिमा को ही समाप्त होती है।
महाराष्ट्र में इसे नारियल पूर्णिमा कहते हैं। राजस्थान में रामराखी होती है जो सामान्य राखी से भिन्न होती है। इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुँदना लगा होता है और यह भगवान् को बाँधी जाती है । चूड़ा राखी भाभी या महिलाओं की चूड़ियों पर लटकन की तरह से बांधा जाता है । दक्षिण भारत में श्रावण की पूर्णिमा को अवनि अवित्तम कहा जाता है और ब्राह्मणों द्वारा नई यज्ञोपवीत धारण की जाती है । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जन जागरण के लिए भी इस पर्व को माध्यम बनाया गया था।
श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बंग-भंग का विरोध करते समय रक्षा बंधन त्यौहार को बंगाल के निवासियों के पारस्परिक भाईचारे तथा एकता का प्रतीक बनाकर इसका राजनीतिक उपयोग आरम्भ किया । 1905 में उनकी प्रसिद्ध कविता ,” मातृभूमि वन्दना ” में वे लिखते हैं ,” हे प्रभु , मेरे बंग देश की धरती, नदियां , वायु , फूल – सब पावन हों , हे प्रभु , मेरे बंग देश के प्रत्येक भाई बहन के उर अन्तः स्थल , अविछन्न , अविभक्त एवं एक हों ।”
राखी के अवसर पर भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा दस रुपये का एक आकर्षक लिफाफा जारी किया गया है , जिसमें पांच रुपये लिफाफे की कीमत और पांच रुपये डाक शुल्क होता है । राखी का समय बारिश के मौसम में होता है अतः 2007 में वाटर प्रूफ लिफाफे भी जारी किये गए । राखी के समय डाक व्यवस्था पर बीस प्रतिशत अधिक काम का बोझ होता है परन्तु डाक व्यवस्था राखी वाले लिफाफों को सुरक्षित और तेजी से पहुंचाने के लिए कटिबद्ध है ।
कुछ डाक घरों के बाहर राखी भी बेची जाती है जिससे लोग वहीँ पर राखी खरीद कर तुरंत भेज सकें । इतना ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी राखी भेजने की व्यवस्था उपलब्ध है । हमारे देश के त्यौहार विश्व में भाईचारे , मानवता , सहृदयता और एकता का सन्देश देते हैं । रक्षा बंधन का महत्व इस दृष्टि से भी अधिक है । यह एक ऐसा त्यौहार है की कोई भी लड़का या पुरुष राखी बंधवाने को उतावला रहता है और सभी लड़कियां और स्त्रियां राखी बांधने के लिए हाथ ढूंढती है ।
आज के दिन यदि अवसर मिले तो बहनों को हमारे देश की सचमुच रक्षा करने वालों के हाथों पर राखी अवश्य बांधनी चाहिए । देश के भीतर हर तरह की सुरक्षा का ध्यान रखने वाले सुरक्षा कर्मचारी और देश की सीमा पर रक्षा करने वाले सैनिकों की कलाइयां ही राखियों के लिए हैं । ये न केवल वचन से बल्कि कर्म से रक्षा करते हैं ।
वर्तमान में मानव बहुत सी परिस्थितियों से जूझ रहा है , ऐसे में रक्षा बंधन जैसा त्यौहार सबको एक सूत्र में बांधने के लिए अवश्य बहुत उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए । अपने हाथों पर बंधे पवित्र धागे को स्पर्श कर संकल्प लेने का समय है कि बहनों की ही नहीं प्रत्येक स्त्री की रक्षा करनी है और यही सन्देश को सबको देना है ।
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