नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में गतिरोध के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष ने “लोकतंत्र की रक्षा” की है और सरकार की “परिसीमन से जुड़ी साजिश” को नाकाम कर दिया है।
‘लोकतंत्र की बड़ी जीत’ का दावा
प्रियंका गांधी ने कहा कि हालिया घटनाक्रम लोकतंत्र और संविधान की जीत है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार जिस तरीके से महिला आरक्षण बिल को लेकर आगे बढ़ रही थी, उसमें संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश दिखाई दे रही थी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
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केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि Narendra Modi सरकार ने महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन साल तक इस कानून को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और अब अचानक नोटिफिकेशन जारी कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई।
उनका कहना था कि सरकार की असली मंशा परिसीमन के जरिए चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में करना था, जिसके लिए महिला आरक्षण को एक माध्यम बनाया गया।
पुराने बिल को लागू करने की मांग
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पूरी तरह पक्ष में है, लेकिन उनका मानना है कि पहले से लंबित महिला आरक्षण बिल को ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकमत है और सरकार के वर्तमान तरीके का समर्थन नहीं करता।
‘महिलाओं का इस्तेमाल’ करने का आरोप
कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि सरकार महिला आरक्षण के जरिए खुद को महिलाओं का हितैषी साबित करना चाहती है। उनके अनुसार, यदि बिल पास होता तो सरकार इसे अपनी जीत बताती और अगर नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी करार देती।
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राजनीतिक टकराव और आगे की राह
महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष प्रक्रिया और मंशा पर सवाल उठा रहा है।
आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है, खासकर तब जब परिसीमन और जनगणना जैसे विषय भी इससे जुड़े हुए हैं। फिलहाल, संसद में सहमति की कमी के चलते इस अहम बिल पर अनिश्चितता बनी हुई है।

