FIR में वीरेंद्र कुमार, आशुतोष वर्मा, पूर्णिमा वर्मा, निशा परमार, एस्ट्रास्पोर्ट्स एंड इवेंट्स मैनेजमेंट एलएलपी, स्पोर्टकी टेक्नो और टाइमलेस स्पोर्ट्स एलएलपी और टाइमलेस स्पोर्ट्स एलएलपी को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर (FIR) में वीरेंद्र कुमार को ईजी ट्रिप प्लानर्स लिमिटेड का तत्कालीन सीनियर वाइस प्रेसीडेंट बताया गया है। एफआईआर में वीरेंद्र कुमार के बारे में लिखा है कि वह पांच सितंबर 2022 से सीनियर वाइस प्रेसीडेंट थे।
कंपनी की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने खो-खो विश्व कप के आयोजन और उससे जुड़े भुगतान की प्रक्रिया में कंपनी के फंड का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि खो-खो विश्व कप के आयोजन और उससे जुड़े भुगतान की प्रक्रिया में कंपनी के फंड को कथित तौर पर दूसरी संस्थाओं और फर्मों को हस्तांतरित किया गया।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इन आरोपों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है।
इस संबंध में जनसत्ता ने जब वीरेंद्र कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि आपको गलत जानकारी मिली है। मेरे खिलाफ FIR नहीं हुई है। भारतीय खो खो महासंघ के पूर्व महासचिव एमएस त्यागी ने बताया कि अब वह सचिव नहीं हैं। आप वर्तमान महासचिव से बात करें। वर्तमान महासचिव उपकार सिंह ने बताया कि उन्होंने मंदिर मार्ग स्थित अपराध शाखा में खो खो विश्व कप से जुड़े खर्चों की प्रति पेश की है। इसके अलावा कुछ भी बताने से मना कर दिया।
ईजी ट्रिप प्लानर्स को बनाया गया था इवेंट का Execution Partner
प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के मुताबिक, ईजी ट्रिप प्लानर्स लिमिटेड ने जनवरी 2025 में नई दिल्ली में आयोजित खो-खो विश्व कप के लिए खो खो एंड स्पोर्ट्स प्रमोशनल ट्रस्ट (KKSPT) के साथ समझौता किया था। एफआईआर में केकेएसपीटी को खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया (KKFI) की प्रबंध इकाई बताया गया है।
शिकायत के अनुसार, ईजी ट्रिप प्लानर्स और केकेएसपीटी के बीच चार नवंबर 2024 को विस्तृत समझौता हुआ था और अगले दिन एक अतिरिक्त जानकारी जोड़ी भी गई थी। समझौते के तहत ईजी ट्रिप प्लानर्स लिमिटेड को विश्व कप के आयोजन के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई थी। कंपनी को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा, होटल, लॉजिस्टिक्स और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं का प्रबंधन करना था।
एफआईआर में करार के हवाले से आयोजन के लिए 25 करोड़ रुपये की शुद्ध देय राशि का उल्लेख है, जिसे स्पॉन्सरशिप के जरिये हासिल किया जाना था। शिकायतकर्ता कंपनी के मुताबिक, आयोजन पूरा होने के बाद उसने करीब 35.11 करोड़ रुपये का खर्च किया।
FIR में यह भी कहा गया है कि 21 मई 2025 को केकेएफआई की ओर से ईजी ट्रिप प्लानर्स को बकाया रकम के एक हिस्से का भुगतान महाराष्ट्र सरकार से धन मिलने के बाद करने और बाकी भुगतान स्पोर्टकी टेक्नो के माध्यम से कराने का आश्वासन दिया गया था।
वीरेंद्र कुमार पर क्या है आरोप?
शिकायत में वीरेंद्र कुमार को आरोपी नंबर-1 बनाया गया है। एफआईआर में उन्हें सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (MICE Division) बताया गया है। कहा गया है कि वीरेंद्र कुमार के पास MICE Division से जुड़े वित्तीय मामलों और आयोजन को पूरा करने की जिम्मेदारी थी।
कंपनी की शिकायत के मुताबिक, वीरेंद्र कुमार को विक्रेताओं को भुगतान मंजूर करने, बुकिंग को मंजूरी देने और बिल या चालान को लेखा-जोखा तथा भुगतान के लिए प्रमाणित करने का अधिकार था।
कंपनी का आरोप है कि आंतरिक वित्तीय समीक्षा के दौरान कई अनधिकृत लेन-देन और वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वीरेंद्र कुमार ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए ऐसे तीसरे पक्ष के विक्रेताओं और संस्थाओं को भुगतान कराया, जिन्हें कंपनी की निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं मिली थी।
स्पोर्टकी टेक्नो को 1.83 करोड़ रुपये का भुगतान
FIR में स्पोर्टकी टेक्नो को उन संस्थाओं में शामिल किया गया है, जिन्हें शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर फर्जी संस्थाएं बताया है। दस्तावेज के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर में पंजीकृत यह एकल स्वामित्व वाली फर्म आरोपी नंबर-2 आशुतोष वर्मा के भाई की बताई गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस फर्म का अप्रत्यक्ष नियंत्रण आशुतोष वर्मा के पास था। शिकायत के मुताबिक, वीरेंद्र कुमार और आशुतोष वर्मा की कथित मिलीभगत से Sportki Techno को ऐसी सेवाओं के नाम पर भुगतान किया गया, जो वास्तव में उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।
FIR में इस फर्म को किये 8 लेन-देन (कुल रकम एक करोड़ 83 लाख 47 हजार 907 रुपये) का विवरण है। शिकायत में यह भी आरोप है कि कंपनी को एक करोड़ 23 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन दिया गया था।
पत्नी से जुड़ी फर्म को 29 लाख रुपये
FIR में एस्ट्रास्पोर्ट्स एंड इवेंट्स मैनेजमेंट एलएलपी को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत के मुताबिक, इस फर्म को चार अगस्त 2025 को पंजीकृत किया गया था और इसका पहले से कोई कारोबारी इतिहास नहीं था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस फर्म का गठन कथित तौर पर ईजी ट्रिप प्लानर्स के धन को प्राप्त करने के लिए किया गया था। FIR के अनुसार, इस LLP में आशुतोष वर्मा, पूर्णिमा वर्मा और निशा परमार जुड़े हैं। शिकायत में निशा परमार को वीरेंद्र कुमार की पत्नी बताया गया है।
इस फर्म को दो भुगतान (कुल रकम 29 लाख रुपये) किये गए। आरोप है कि इन भुगतानों के लिए आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। हालांकि, इन रिश्तों, कंपनियों और लेन-देन से जुड़े आरोप फिलहाल शिकायत और FIR में दर्ज आरोप हैं। इन पर अदालत का कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।
टाइमलेस स्पोर्ट्स एलएलपी को 51.50 लाख रुपये
FIR में तीसरी फर्म टाइमलेस स्पोर्ट्स एलएलपी के बारे में कहा गया है कि यह कथित तौर पर आशुतोष वर्मा के अप्रत्यक्ष नियंत्रण में थी। शिकायत के अनुसार, वीरेंद्र कुमार ने कंपनी की निर्धारित अनुमोदन प्रक्रिया का पालन किए बिना इस फर्म को भुगतान कराया।
FIR में 30 जुलाई 2025 को 22 लाख रुपये और पांच अगस्त 2025 को 29.50 लाख रुपये के दो भुगतान दर्ज हैं। इन लेन-देनों को कथित अनधिकृत भुगतान बताया गया है।
प्रचार कम्युनिकेशंस को 6.63 करोड़ रुपये
FIR में उन फर्म्स को किए गए भुगतानों का एक अलग विवरण भी है, जिनके बारे में कहा गया है कि आंतरिक जांच के दौरान उनके काम और भुगतान की पुष्टि के लिए भेजे गए ई-मेल और कम्युनिकेशंस का जवाब नहीं मिला। इनमें प्रचार कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड को किए गए भुगतान प्रमुख हैं।
FIR में 16 नवंबर 2024 से 24 जनवरी 2025 के बीच कई लेन-देन का विवरण दिया गया है। इन भुगतानों की कुल रकम छह करोड़ 63 लाख 20 हजार 112 रुपये बताई गई है। शिकायतकर्ता ने इन लेन-देन में कई समान रकम के बार-बार भुगतान को भी संदेहास्पद बताया है।
टूर प्रबंधक को करीब 2.95 करोड़ रुपये
दूसरा बड़ा भुगतान टूर प्रबंधक नाम की फर्म किया गया बताया गया है। FIR में 26 जुलाई 2024 से 13 अक्टूबर 2025 तक के कई लेन-देन का विवरण है। इन लेन-देन की कुल रकम दो करोड़ 95 लाख 49 हजार 491 रुपये बताई गई है। आरोप है कि इन भुगतानों का कोई पर्याप्त व्यावसायिक आधार नहीं था और आंतरिक जांच के दौरान संबंधित फर्म से संपर्क करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
निर्मल फाइनेंस को 36 लाख रुपये का भुगतान
FIR के मुताबिक, वित्तीय रिकॉर्डों की जांच में निर्मल फाइनेंस एंड कंसलटेंसी सर्विसेज को करीब 36 लाख रुपये भुगतान भी सामने आया। आरोप है कि इस संस्था का ईजी ट्रिप प्लानर्स के साथ कोई संविदात्मक, व्यावसायिक या परिचालन संबंध नहीं था। कंपनी ने इसे अनधिकृत लेन-देन बताया है।
कॉरपोरेट ग्राहकों के खातों में भी कथित हेरफेर
शिकायत में केवल विक्रेताओं को किये गए भुगतानों का मामला नहीं है। ईजी ट्रिप प्लानर्स ने आरोप लगाया है कि आंतरिक जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुछ मौजूदा व्यावसायिक ग्राहकों के खातों में कथित तौर पर ‘आतिथ्य शुल्क’ दर्ज करने की कोशिश की गई।
शिकायत के अनुसार, इन ग्राहकों से संबंधित आयोजनों पर वास्तव में ऐसा कोई खर्च नहीं हुआ था, लेकिन उनके खातों में इसे दर्ज करने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इसका उद्देश्य खो-खो विश्व कप से जुड़े वास्तविक वित्तीय लेन-देन को छिपाना और कंपनी के धन के कथित हस्तांतरण को सामान्य व्यावसायिक खर्च के रूप में दिखाना था।
ईमेल में भुगतान को ‘गलती से हुआ’ बताया गया
FIR में दावा किया गया है कि आंतरिक जांच के दौरान वीरेंद्र कुमार ने एक ईमेल के जरिये संबंधित भुगतान को ‘गलती से किया गया भुगतान’ बताया और उसे वापस लेने की बात कही। आरोप है कि कई रिमाइंडर्स (अनुस्मारक) भेजने के बावजूद भुगतान नहीं लौटाया गया और रकम की वसूली नहीं हो पाई।
ईआरपी और डिजिटल रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़
मामले में डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वीरेंद्र कुमार को कंपनी के आंतरिक डाटाबेस, वित्तीय प्रणालियों और कामकाज से जुड़े नियंत्रणों तक पहुंच हासिल थी।
FIR में आरोप है कि कंपनी के ईआरपी और लेखा-जोखा सॉफ्टवेयर में प्रविष्टियों में कथित तौर पर बदलाव किये गए और कुछ भुगतानों को गलत या भ्रामक तरीके से दूसरे ग्राहकों के खातों में दर्ज करने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता ने ईमेल के माध्यम से हुए पत्राचार, ईआरपी और लेखा-जोखा सॉफ्टवेयर के अभिलेख तथा बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों को इन आरोपों से संबंधित साक्ष्य बताया है।
शिकायत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत भी कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, आर्थिक अपराध शाखा ने जो FIR दर्ज की है, उसमें फिलहाल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 318(4), 316(2), 316(5), 336(3), 340(2) और 61(2) लगाई गई हैं।
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