मुंबई। सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी चर्चित अभिनेत्री व कंटेंट क्रिएटर Shenaz Treasury इन दिनों अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। भारत में साफ-सफाई और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर की गई उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। कई यूजर्स ने उनके बयान को देश का अपमान बताते हुए उन्हें एंटी नेशनल तक कह दिया। वहीं कुछ लोगों ने उनके बयान को एक कड़वी सच्चाई बताते हुए समर्थन भी किया है।
दरअसल, शहनाज ट्रेजरी ने एक इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट के दौरान भारत में गंदगी, ट्रैफिक और सार्वजनिक सुविधाओं की कमी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे गंदे देशों में से एक लगता है। उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि देश की कमियों को इस तरह वैश्विक मंच पर पेश करना गलत है, जबकि अन्य लोगों ने माना कि साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं को लेकर भारत को अभी काफी सुधार की जरूरत है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर कई यूजर्स ने शहनाज ट्रेजरी की आलोचना करते हुए लिखा कि अगर उन्हें भारत पसंद नहीं है तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। कुछ यूजर्स ने कहा कि विदेशी देशों की तुलना में भारत की परिस्थितियां अलग हैं और यहां की आबादी व चुनौतियां भी बहुत बड़ी हैं। वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पब्लिसिटी पाने के लिए जानबूझकर ऐसा बयान दिया गया है।
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हालांकि विवाद बढ़ने के बाद शहनाज ट्रेजरी ने अपनी सफाई भी पेश की। उन्होंने कहा कि उनका मकसद भारत का अपमान करना नहीं था, बल्कि लोगों का ध्यान साफ-सफाई और नागरिक जिम्मेदारी की ओर आकर्षित करना था। उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत से प्यार करती हैं, लेकिन देश में सफाई व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की जरूरत है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी सेलिब्रिटी के बयान पर सोशल मीडिया में बड़ा विवाद खड़ा हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में कई अभिनेता और सार्वजनिक हस्तियां अपने विचारों के कारण ट्रोलिंग का शिकार हो चुकी हैं। सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बयान का असर तेजी से देखने को मिलता है और लोग खुलकर अपनी राय रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्वच्छता को लेकर सरकार और समाज दोनों स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। Swachh Bharat Mission जैसे अभियानों के बावजूद कई शहरों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की समस्या अभी भी बनी हुई है। ऐसे में यह बहस फिर शुरू हो गई है कि देश की कमियों पर खुलकर बात करना गलत है या सुधार के लिए जरूरी।


