US Dollar के मुकाबले Rupee फिर कमजोर, 18 पैसे टूटा

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    डॉलर के मुकाबले रुपया फिर धड़ाम
    शुरुआती ट्रेड में डॉलर के मुकाबले रुपये में 18 पैसे की गिरावट दर्ज की गई।

    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ते दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय Rupee मंगलवार को US Dollar के मुकाबले कमजोर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया 18 पैसे की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों का असर भारतीय मुद्रा पर लगातार देखने को मिल रहा है।

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    मंगलवार सुबह इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर शुरुआत के साथ खुला। शुरुआती ट्रेड में रुपये में 18 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपया दबाव में रहा था।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहा है, जिसका फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी सख्त नीति का असर भी उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ रहा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से भारतीय रुपये सहित कई एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है।

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    वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और इससे रुपये पर दबाव पड़ता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो आने वाले दिनों में रुपये में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर बाजार में हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। RBI की रणनीति का उद्देश्य अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना होता है।

    रुपये में गिरावट का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। डॉलर महंगा होने से विदेश से आयात होने वाले सामान की कीमत बढ़ सकती है। खासतौर पर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा कंपनियों की आयात लागत बढ़ने से महंगाई पर भी दबाव बन सकता है।

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    शेयर बाजार पर भी रुपये की कमजोरी का असर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों के सतर्क रुख के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर रुपये की दिशा तय होगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आती है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार में लौटता है तो रुपये को कुछ मजबूती मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों और कारोबारियों के लिए मुद्रा बाजार की हर हलचल पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

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