नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते एलपीजी सप्लाई पर दबाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाले 5 किलो LPG सिलेंडर (छोटू) के दैनिक आवंटन को दोगुना कर दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्गों को राहत देना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है कि देश में खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को खाना बनाने के लिए गैस की कमी न हो।
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क्या है ‘छोटू’ LPG सिलेंडर?
5 किलो का यह छोटा सिलेंडर, जिसे ‘छोटू’ कहा जाता है, खासतौर पर उन लोगों के लिए शुरू किया गया था जिनके पास स्थायी पता (Address Proof) नहीं होता।
- इसे खरीदने के लिए केवल पहचान पत्र (ID Proof) की जरूरत होती है
- यह प्रवासी मजदूरों के लिए काफी सुविधाजनक है
- इसमें बायबैक (Buyback) की सुविधा भी उपलब्ध है
पहले क्या थी सीमा?
पहले राज्यों को 5 किलो सिलेंडर की सप्लाई एक तय सीमा (करीब 20%) के भीतर दी जाती थी। अब केंद्र ने इस सीमा से ऊपर जाकर अतिरिक्त आवंटन देने का फैसला किया है, जिससे जरूरतमंदों तक अधिक सिलेंडर पहुंच सकें।
कैसे होगा वितरण?
- अतिरिक्त सिलेंडर सिर्फ प्रवासी मजदूरों को ही दिए जाएंगे
- वितरण में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) मदद करेंगी
- राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे इस सप्लाई का सही उपयोग सुनिश्चित करें
किस आधार पर बढ़ाया गया कोटा?
सरकार ने मार्च के शुरुआती दिनों में प्रवासी मजदूरों को दिए गए सिलेंडरों की औसत खपत के आधार पर नया कोटा तय किया है, ताकि वास्तविक जरूरत के अनुसार आपूर्ति हो सके।
क्या होगा फायदा?
- ब्लैक मार्केटिंग पर लगाम लगेगी
- मजदूरों को सस्ती और आसान गैस उपलब्ध होगी
- खाना बनाने की बुनियादी जरूरत पूरी होगी
केंद्र सरकार का यह फैसला मौजूदा परिस्थितियों में राहत देने वाला माना जा रहा है। 5 किलो LPG सिलेंडर का बढ़ा हुआ आवंटन प्रवासी मजदूरों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

