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हेडलाइन: महिला आरक्षण पर लोकसभा में सियासी तकरार, अखिलेश के बयान पर स्मृति ईरानी का पलटवार

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान सियासी माहौल उस समय गरमा गया, जब Akhilesh Yadav के बयान पर Smriti Irani ने तीखा जवाब दिया। दोनों नेताओं के बीच जुबानी तकरार ने इस अहम बहस को और राजनीतिक रंग दे दिया।

दरअसल, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान स्मृति ईरानी पर तंज कसते हुए कहा, “अगर सीटें आरक्षित कर दी जाएंगी तो महिलाओं में आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। आपकी वो सास-बहू वाली भी हार गई।” उनके इस बयान को व्यक्तिगत टिप्पणी के रूप में देखा गया, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।

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स्मृति ईरानी का तीखा जवाब

अखिलेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, “सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया। यह अच्छी बात है कि जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है, वे उन लोगों को भी याद रखते हैं जो अपने दम पर पहचान बनाते हैं।”

ईरानी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने आगे कहा, “वे कामकाजी महिलाओं पर टिप्पणी करते हैं, जिन्होंने खुद अपने जीवन में कभी नौकरी नहीं की। अपना ध्यान टीवी सीरियल से हटाकर संसद की कार्यवाही पर लगाइए और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस अहम बिल को पास करवाइए।”

OBC आरक्षण पर उठे सवाल

लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया, लेकिन इसके साथ ही OBC महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी Ram Manohar Lohia के जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के सिद्धांतों पर चलती है।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा OBC वर्ग की महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण में उचित हिस्सेदारी देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि जब तक सामाजिक न्याय के सभी पहलुओं को शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक यह बिल अधूरा रहेगा।

परिसीमन को लेकर भी विवाद

सपा प्रमुख ने परिसीमन (Delimitation) को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि परिसीमन से पहले जनगणना कराना जरूरी है, ताकि सही आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ उठाने की रणनीति बना रही है।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “अब भारतीय जनता पार्टी नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही है। जिन्होंने अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं दिया, वे उनके सम्मान की बात कैसे कर सकते हैं?”

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सियासी संदेश और असर

महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर हो रही चर्चा के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों और तीखे जवाबों ने बहस का फोकस कुछ हद तक बदल दिया है। हालांकि, दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने तरीके से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाया है।

महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर संसद में चर्चा जारी है, लेकिन सियासी बयानबाजी के चलते बहस का स्तर भी चर्चा में बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बन पाती है या नहीं।

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