हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्होंने कलाकारों की किस्मत बदल दी। साल 1982 में रिलीज हुई Prem Rog भी ऐसी ही एक फिल्म थी, जिसने न सिर्फ सामाजिक मुद्दे को बड़े पर्दे पर मजबूती से उठाया, बल्कि एक अभिनेता को नया मुकाम भी दिया।
इस फिल्म का निर्देशन दिग्गज फिल्मकार Raj Kapoor ने किया था। विधवा विवाह जैसे संवेदनशील विषय पर बनी इस फिल्म में Rishi Kapoor और Padmini Kolhapure मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई।
रजा मुराद को लेकर था विरोध
इस फिल्म से अभिनेता Raza Murad को एक खतरनाक विलेन के रूप में पहचान मिली। हालांकि, यह रोल उन्हें आसानी से नहीं मिला था।
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बताया जाता है कि जब राज कपूर फिल्म की कास्टिंग कर रहे थे, तब उन्होंने एक फिल्म में रजा मुराद की झलक देखकर उन्हें ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह के किरदार के लिए चुन लिया था, जबकि उस समय वह इंडस्ट्री में बड़ा नाम नहीं थे।
दिलचस्प बात यह है कि राज कपूर के बेटों—Randhir Kapoor और Rishi Kapoor—ने इस चयन का विरोध किया था। उनका मानना था कि रजा मुराद इस किरदार के लिए फिट नहीं बैठते और दर्शकों पर असर नहीं छोड़ पाएंगे।
फैसले पर अडिग रहे राज कपूर
विरोध के बावजूद राज कपूर अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने साफ कहा कि इस किरदार के लिए उनकी पहली और आखिरी पसंद रजा मुराद ही हैं। अगर वे मना करते हैं, तभी किसी दूसरे नाम पर विचार किया जाएगा।
रजा मुराद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस दौर में उनका करियर खास ऊंचाई पर नहीं था और उन्हें बड़े मौके नहीं मिल रहे थे। ऐसे समय में राज कपूर का यह भरोसा उनके लिए बेहद अहम साबित हुआ।
सेट पर मिला खास सम्मान
फिल्म की शूटिंग के दौरा भी रजा मुराद को खास सम्मान मिला। जब वे पहली बार सेट पर पहुंचे, तो राज कपूर ने उन्हें पूरी टीम से ऐसे मिलवाया जैसे कोई विशेष अतिथि आया हो। इससे अभिनेता का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने किरदार में पूरी जान डाल दी।
शूटिंग पूरी होने के बाद राज कपूर ने फिल्म का प्रदर्शन कर विरोध करने वालों से पूछा था कि क्या इस किरदार के लिए इससे बेहतर कोई हो सकता था। इसके बाद सभी ने उनकी पसंद को सही माना।
फिल्म की सफलता और असर
‘प्रेम रोग’ ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहरी छाप छोड़ी। फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा।
खासतौर पर रजा मुराद के निभाए ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह के किरदार ने उन्हें बॉलीवुड में एक मजबूत विलेन के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों में इसी तरह के दमदार नकारात्मक किरदार मिलने लगे।
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‘प्रेम रोग’ सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं थी, बल्कि यह उस विश्वास की कहानी भी है, जिसमें एक निर्देशक ने अपनी पसंद पर भरोसा किया और एक कलाकार को नई पहचान दी। राज कपूर का यह फैसला आज भी बॉलीवुड के इतिहास में एक मिसाल के रूप में याद किया जाता है।

