पंजाब के मानसा जिले में गेहूं की खरीद में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। Bharatiya Kisan Union (Ugrahan) के बैनर तले किसानों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना देकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने सरकार और एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को उठाया।
किसानों का कहना है कि मंडियों में गेहूं की खरीद प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों से फसल लाकर मंडियों में डालने के बाद भी कई दिनों तक खरीद नहीं हो रही, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
सैंपलिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं राम सिंह, इंद्रजीत सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई टीमों की ओर से गेहूं के दानों की सख्त सैंपलिंग की जा रही है।
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किसानों का आरोप है कि इस सैंपलिंग प्रक्रिया के कारण खरीद में और देरी हो रही है। कई बार मामूली कारणों से फसल को रिजेक्ट कर दिया जाता है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि सैंपलिंग के नियमों को सरल बनाया जाए और किसानों को राहत दी जाए, ताकि उनकी फसल समय पर खरीदी जा सके।
तुरंत खरीद और राहत की मांग
किसान नेताओं ने सरकार से अपील की कि मंडियों में पड़ी गेहूं की फसल को तुरंत खरीदा जाए। उनका कहना है कि अन्य राज्यों में किसानों को राहत दी जा रही है, उसी तरह पंजाब के किसानों को भी राहत मिलनी चाहिए।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि खरीद प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ओलावृष्टि से नुकसान, मुआवजा नहीं
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश से फसल को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई मुआवजा दिया गया है।
किसानों के अनुसार, एक तरफ फसल खराब हुई है और दूसरी तरफ खरीद में देरी हो रही है, जिससे उनकी स्थिति और भी खराब हो गई है।
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प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी
धरने पर बैठे किसानों ने साफ कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो पूरे राज्य में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
मानसा में किसानों का यह प्रदर्शन पंजाब में गेहूं खरीद व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी कर पाती है।

