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कैसी भी हो परिस्थिति, एक सी हो मनोस्थिति चंडीगढ़ में महिला समागम में गूंजा आध्यात्मिक संदेश

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कैसी भी हो परिस्थिति, एक सी हो मनोस्थिति चंडीगढ़ में महिला समागम

चंडीगढ़: सेक्टर-30 स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को महिला समागम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों, बच्चियों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड की सदस्य जोगिंद्र कौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संदेश संगत तक पहुंचाते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मनोस्थिति को संतुलित और स्थिर बनाए रखना ही सच्ची आध्यात्मिकता का आधार है।

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समागम के दौरान विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं ने गीत, कविताएँ, भाषण और लघु नाटिकाओं के माध्यम से सत्संग, सेवा और सिमरन से जुड़े अपने अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्ति, उत्साह और आनंद से भर दिया।

अपने संबोधन में जोगिंद्र कौर ने कहा कि सतगुरु का सदा यही संदेश रहा है—“कैसी भी हो परिस्थिति, एक सी हो मनोस्थिति।” उन्होंने बताया कि जीवन में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों से घबराने के बजाय सेवा, सिमरन और सत्संग के मार्ग पर चलकर उन्हें सहज रूप से पार किया जा सकता है। उन्होंने इसे समुद्र में चलती नाव की उपमा देते हुए कहा कि जैसे नाव लहरों के बीच भी आगे बढ़ती रहती है, वैसे ही श्रद्धालु भी आध्यात्मिकता के सहारे जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि सतगुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के बाद ही व्यक्ति अपने विश्वास को सुदृढ़ कर पाता है और जीवन को सरल व सहज तरीके से जी सकता है। जो व्यक्ति सतगुरु के आदेशों का पालन करते हुए सेवा, सिमरन और सत्संग में दृढ़ रहता है, वही वास्तव में परमात्मा को अपने भीतर अनुभव कर पाता है।

कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में युवा वर्ग को सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर दिए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी क्षमताओं का विकास होता है, बल्कि वे सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।

उन्होंने अभिभावकों की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन प्रदान कर उन्हें सफल बनाना चाहते हैं, वैसे ही सतगुरु भी चाहते हैं कि युवा वर्ग आध्यात्मिकता से जुड़कर उच्च आदर्शों को अपनाए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने समय का सदुपयोग सेवा, सिमरन और सत्संग में करें, जिससे वे बुरी आदतों और भटकाव से दूर रहकर समाज में प्रेम, शांति और सद्भावना का संदेश फैला सकें।

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समागम के अंत में संयोजक नवनीत पाठक एवं जोनल इंचार्ज ओ.पी. निरंकारी ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का धन्यवाद किया।

यह महिला समागम आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सकारात्मक सोच का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।

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