नई दिल्ली। पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। पिछले कई हफ्तों से जारी संघर्ष के बाद अब शांति वार्ता की कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जबकि इजराइल ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। दूसरी तरफ ईरान लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ तो जवाब और ज्यादा खतरनाक होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रही है बातचीत?
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है। ईरान ने माना है कि इस प्रस्ताव से दोनों देशों के बीच कुछ मतभेद कम हुए हैं, लेकिन अभी कई मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। सबसे बड़ा विवाद ईरान के यूरेनियम भंडार और होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। वहीं ईरान ने कहा है कि वह दबाव में आकर अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा।
पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
इस पूरे संकट में पाकिस्तान भी अहम भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हालात बेहद जटिल हैं और किसी भी समय तनाव फिर बढ़ सकता है। ईरान अब भी अपने परमाणु कार्यक्रम और होरमुज क्षेत्र पर नियंत्रण छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है।
इजराइल हाई अलर्ट पर, सेना बोली- कार्रवाई जारी रहेगी
इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी खतरे को हल्के में नहीं लेगा। इजराइली सेना के प्रमुख ने कहा है कि देश की सेना सबसे उच्च स्तर की सतर्कता पर है और जरूरत पड़ने तक सैन्य अभियान जारी रहेंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार इजराइल को आशंका है कि ईरान अचानक बड़े हमले की कोशिश कर सकता है। इसी कारण इजराइल अपनी सीमा सुरक्षा और एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है।
अमेरिका पर बढ़ रहा युद्ध का दबाव
इस युद्ध का असर अब अमेरिकी राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य शक्तियों को सीमित करने की मांग उठ रही है। अमेरिकी कांग्रेस में युद्ध से जुड़े प्रस्तावों पर बहस तेज हो गई है। कुछ सांसदों का कहना है कि लंबे युद्ध से अमेरिका की सैन्य क्षमता और अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।
एक नई जनमत सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक अब इस युद्ध के खिलाफ हैं। खासतौर पर डेमोक्रेट समर्थकों में युद्ध विरोधी भावना तेजी से बढ़ी है।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि अगर हालात और बिगड़े तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
भारत समेत कई देशों पर इसका आर्थिक असर पड़ सकता है, क्योंकि होरमुज मार्ग से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है।
युद्ध खत्म होगा या फिर बढ़ेगा खतरा?
फिलहाल अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। एक तरफ बातचीत जारी है, दूसरी तरफ सभी पक्ष सैन्य तैयारी भी कर रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर टिकी हुई है। अगर समझौता नहीं हुआ तो मध्य पूर्व में फिर बड़े युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।


