नई दिल्ली। भारत अपनी वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। भारतीय वायुसेना के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। वर्ष 2026 में लड़ाकू विमानों को लेकर देश में बड़े रक्षा सौदों, स्वदेशी तकनीक और नई पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर खास ध्यान दिया जा रहा है। चीन और पाकिस्तान से बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत अपनी एयर पावर को नई ताकत देने की तैयारी में जुटा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा फाइटर जेट सौदा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें कुछ विमान सीधे फ्रांस से आएंगे जबकि बाकी का निर्माण भारत में किया जा सकता है। इससे मेक इन इंडिया अभियान को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
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इसके साथ ही भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर भी तेजी से काम कर रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का तेजस मार्क-2 प्रोजेक्ट अब टेस्टिंग के अहम चरण में पहुंच चुका है। यह विमान मौजूदा तेजस की तुलना में ज्यादा ताकतवर और आधुनिक होगा। इसमें नई पीढ़ी के इंजन, बेहतर रडार और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें लगाई जाएंगी।
भारत पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर विमान AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर भी तेजी से काम कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह विमान भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। इसके अलावा भारत भविष्य की छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।
रूस ने हाल ही में अपने नए दो-सीटर Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट की झलक दिखाई है। इसके बाद भारत में भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से भविष्य में रूस के साथ नए रक्षा सहयोग पर विचार कर सकता है।
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इसी बीच भारतीय वायुसेना ने वायुशक्ति-2026 अभ्यास के दौरान अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस सैन्य अभ्यास में राफेल, सुखोई-30MKI, तेजस और कई आधुनिक हथियार प्रणालियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान दिन और रात दोनों समय युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास किया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत का फोकस सिर्फ विदेशी लड़ाकू विमान खरीदने पर नहीं बल्कि स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर भी रहेगा। सरकार चाहती है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और भविष्य में दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो।


