सेक्टर-34 मेला ग्राउंड में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, परमात्मा की पहचान को बताया मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य
चंडीगढ़। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के पावन आशीर्वाद से चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित मेला ग्राउंड में विशाल निरंकारी संत समागम आयोजित किया गया। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समागम में पहुंचे और निरंकारी राजपिता रमित जी के आध्यात्मिक विचारों को सुना। बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति को कम नहीं कर सकी।
समागम के दौरान संतों ने गीतों, भजनों और विचारों के माध्यम से सतगुरु की शिक्षाओं को साझा किया। इससे समागम स्थल का वातावरण प्रेम, भक्ति और श्रद्धा से भर गया।

निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य माया, धन-दौलत और शोहरत की चकाचौंध में खोना नहीं, बल्कि परमात्मा की पहचान करना है। सतगुरु द्वारा प्रदान किया गया ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है और परमात्मा के साथ उसके संबंध का एहसास करवाता है।
उन्होंने कहा कि संसार के आकर्षणों में उलझकर मनुष्य कई बार जीवन के मूल उद्देश्य को भूल जाता है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से जब मनुष्य को यह एहसास होता है कि वह परमात्मा का अंश है, तो जीवन को सही दिशा और भक्ति को वास्तविक भाव मिलता है।
भारी बारिश का उल्लेख करते हुए राजपिता रमित जी ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे बरसात भी संतों के प्रेम और भक्ति में शामिल होने आई हो। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संत वर्षा में भीग रहे हैं, उसी प्रकार वे परमात्मा के एहसास, भक्ति और सतगुरु के प्रेम में सदैव भीगे रहें।
उन्होंने अंत में दातार से प्रार्थना की कि सभी श्रद्धालुओं के जीवन में प्रेम, भक्ति और परमात्मा का एहसास निरंतर बना रहे। साथ ही, समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में आयोजित होने वाले वार्षिक संत समागम में श्रद्धालुओं से बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
परमात्मा का एहसास ही मन को भक्ति, प्रेम और समर्पण के भाव से सराबोर करता है।” — निरंकारी राजपिता रमित
.webp)
.webp)


Leave a Reply